कोरोना से डर... जांच वाले 10% लोगों का पता व फोन नंबर गलत, इससे दूसरों को भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है


रांची में लगातार कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में एक ओर जहां जिला प्रशासन संक्रमितों के इलाज के लिए कोविड केयर सेंटर तैयार करने और बेडों की संख्या बढ़ाने में जुटा है। वहीं दूसरी ओर कोरोना की जांच करानेवाले करीब 8 से 10 फीसदी लोग ऐसे भी सामने आ रहे हैं जो अपना पता और मोबाइल नंबर गलत रजिस्टर करा रहे हैं।

लोगों की इस लापरवाही ने जिला प्रशासन के साथ-साथ आम लोगो की भी परेशानी बढ़ा दी है। कोविड संक्रमण को लेकर बने कंट्रोल रूम से 4 और 5 अगस्त को कुल 291 जांच करानेवाले लोगों को कॉल किया गया। इनमें 50 लोगों का मोबाइल नंबर गलत मिला। इसके कारण पॉजिटिव आने पर भी ऐसे लोगों को जिला प्रशासन ट्रेस नहीं कर पा रही है। इससे दूसरों को भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है।

दो दिनों में ऐसा रहा हाल...223 लोगों को कॉल किया गया 5 अगस्त को

37 लोगों की नहीं हो सकी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, 68 लोगों में से 13 की ट्रेसिंग नहीं 4 अगस्त को

ये सही नहीं... पिछले 10 दिनों से लगातार आ रहे मामले

समाहरणालय स्थित कंट्रोल रूम को बीते 10 दिनों से लगातार फोन नंबर या एड्रेस गलत होने के मामले आ रहे हैं। कभी किसी दिन 30 से ज्यादा के मोबाइल नंबर गलत मिल रहे हैं तो किसी दिन 3-5 भी। औसत की बात करें तो यह 8 से 10 फीसदी है।

सरकारी-निजी लैब को निर्देश मोबाइल नंबर वेरीफाई करें

मामला सामने आने के बाद डीसी छवि रंजन ने सैंपल जांच के दौरान लोगों से सही पता, फोन नंबर के साथ एक अन्य नंबर भी देने की अपील की है। सरकारी के अलावा निजी टेस्टिंग लैब को निर्देश दिया है कि फोन नंबर को वेरिफाई जरूर करें।

अब व्हाट्सएप और ईमेल से भी ले सकते हैं कोरोना से जुड़ी जानकारी

रांची जिला में बनाए गए कोविड-19 कंट्रोल रूम में अब व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भी जानकारी ली जा सकेगी। इसके लिए गुरुवार काे जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम का व्हाट्सएप नंबर 8797340500 और ई-मेल आईडी covidcontrol.ranchi@gmail.com जारी किया। इस संबंध में डीसी छवि रंजन ने कहा कि जिला में कोविड-19 की रोकथाम व आमजनों की सहायता के लिए जिला प्रशासन द्वारा 24 घंटे टॉल फ्री हेल्पलाइन नं 1950 जारी किया गया है। साथ ही कोरोना से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए व्हाट्सएप नंबर और ई-मेल से भी संपर्क किया जा सकता है। मालूम हो कि कंट्रोल रूम में कई बार लोग फोन करके जो सूचनाएं देते हैं, वह बाद में गलत साबित होती है।

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