अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर इमरान की बेइज्‍जती, UNSC ने कहा- र‍िकॉर्ड पर नहीं रखेंगे पाक का झूठा बयान


संयुक्त राष्ट्र में भाषण देने के बारे में पाकिस्तान की ओर से अपने स्थायी मिशन की वेबसाइट पर झूठा दावा करना उस पर भारी पड़ गया है। सूत्रों ने बताया कि इंडोनेशिया ने भारत को बताया है कि इस्लामाबाद का बयान रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा। बता दें कि मौजूदा वक्‍त में संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का अध्‍यक्ष है और उसकी ओर से बतौर यूएनएससी डेड उक्‍त बयान को रिकॉर्ड पर नहीं लेने की बात कहना सार्वजनिक तौर पर पाकिस्‍तान की बड़ी बेइज्‍जती है।

दरअसल, पाकिस्तान के स्थायी मिशन ने कल मंगलवार को ट्वीट कर एक झूठा बयान दिया था। झूठे पाकिस्‍तान ने दावा किया था कि उसने सोमवार को सुरक्षा परिषद में आतंकवाद पर स्‍पीच दी जबकि असलियत यह थी कि उसके राजदूत ने कोई भाषण नहीं दिया था। यहां तक कि पाक सोमवार को ऑनलाइन आयोजित वर्चुअल बैठक के लिए वक्ताओं की सूची में भी शामिल नहीं था। बैठक के वीडियो में पाक के प्रतिनिधि मुनीर अकरम कहीं नजर तक नहीं आए। 

संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के अध्‍यक्ष इंडोनेश‍िया ने पाकिस्‍तान के इस झूठ को बड़ी गंभीरता से लिया है। इंडोनेशिया ने भारत के अनुरोध पर स्‍पष्टिकरण दिया कि पाकिस्‍तान के इस झूठे दावे को रिकॉर्ड पर नहीं रखा जाएगा। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से की गई यह कार्रवाई पाकिस्‍तान को शर्मशार करने है। गौर करने वाली बात यह है कि भारत के मिशन ने पाकिस्‍तान के इस झूठे दावे को लेकर करारा हमला बोला था। 

संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारतीय मिशन ने इस दावे के विरोध में कड़ा बयान जारी करते हुए कहा था कि पाकिस्तान ने झूठ बोला है कि उसके दूत मुनीर अकरम ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवाद पर भाषण दिया जबकि सत्र गैर सदस्यों के लिए खुला ही नहीं था। यह बेहद गंभीर मामला है। भारत ने कहा था कि हम समझ नहीं पा रहे हैं कि पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि ने अपना बयान कहां दिया क्योंकि सुरक्षा परिषद का सत्र तो आज गैर-सदस्यों के लिए खुला नहीं था। 

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के मिशन ने मंगलवार को ट्वीट के जरिए एक वीडियो जारी कर कहा था कि उनके राजदूत मुनीर अकरम ने आतंकवाद पर भाषण देकर भारत की निंदा की है। यही नहीं पाक ने आरोप लगाया कि भारत उसके यहां आतंकवादी भेज रहा है और उन्हें हर तरह की मदद मुहैया करा रहा है। पाकिस्तानी मिशन ने यह दावा तब किया जबकि वह सुरक्षा परिषद का सदस्य नहीं है।

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