कोरोना मरीजों के लिए नहीं है पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस, 14 लाख लोगों के लिए मात्र 12 एंबुलेंस


उमेश तिवारी
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हावड़ा : कोरोना से संक्रमित रोगियों को अस्पताल ले जाने के लिए हावड़ा में एंबुलेंस नहीं मिल रहे हैं। जी.हां। सही सुना आपने। हावड़ा में अगर किसी को कोरोना है तो उसे सरकारी एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ेगा। निजी एंबुलेंस उस रोगी के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। कोरोना का आंतक इतना है कि कोई भी एंबुलेंस किराये पर नहीं देना चाहता है। अर्थात हावड़ा के लोगों को सरकारी सहायता पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। अगर निजी एंबुलेंसों को छोड़ दिया जाय तो हावड़ा में रहनेवाले 14 लाख लोगों के लिए सरकार के पास मात्र 12 एंबुलेंस ही है और इसी के भरोसे वे 24 घंटे परिसेवा दे पा रहा है हावड़ा प्रशासन।

प्रशासन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में हावड़ा में औसतन 300 लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। जिसमें से हावड़ा सदर में ही ज्यादातर रोगी हैं। अर्थात 300 रोगियों को लेकर यही 12 एंबुलेंस दिन रात एक किये हुए हैं। लेकिन इनमें से कुछ ही खुशनसीब हैं जिन्हें सरकारी एंबुलेंस की सहायता मिल जाती है। बाकी के किसी तरह अस्पताल पहुंचते हैं। अगर जांच में कोई कोरोना संक्रमित हो रहा है तो उसे नियमानुसार सरकारी सहायता मिलनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। कोरोना से संक्रमित रोगी को तत्काल सहायता नहीं मिल रही है, ऐसे में उसे निजी अस्पतालों के एंबुलेंसों के लिए हाथ- पांव जोड़ना पड़ रहा है। लेकिन एंबुलेंस है कहां। हावड़ा नगर निगम के अधिकारी के अनुसार निगम के पास मात्र 3 ही एंबुलेंस है। जो 24 घंटे अपनी परिसेवा दे रही है. हावड़ा जिला स्वास्थ्य विभाग ने निगम को 8 एंबुलेंस कोरोना काल में दिया हुआ है। इसके अलावा पुलिस का किरन एंबुलेंस भी है। इस तरह से कुल मिलाकर 12 एंबुलेंस ही हावड़ा नगर निगम के पास है।  

इसके अलावा हावड़ा जिला अस्पताल के पास 4 एंबुलेंस, सत्यबाला आईडी अस्पताल के पास 1, डुमुरजला क्वारांटीन सेंटर के पास 1, दक्षिण हावड़ा स्टेट जेनरल अस्पताल के पास 1 एंबुलेंस है। इसके अलावा निगम के 10 बोरो के पास भी 1-1 एंबुलेंस है। जो कोरोना को छोड़ अन्य रोगियों को अस्पताल पहुंचाने का काम करती है।

निगम सूत्रों के अनुसार सबके पास एंबुलेंस है लेकिन कोई कोरोना रोगी को सेवा नहीं देना चाहता। सब जिम्मेदारी सिर्फ हावड़ा नगर निगम की ही है। लेकिन क्या इतने रोगियों के लिए 12 एंबुलेंस पर्याप्त है। क्या इस बुरे समय में सबको मिलकर काम नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि सभी सरकारी और गैरसरकारी अस्पतालों, नर्सिंग होमों और क्लबों को यह निर्देश देना चाहिए कि वे सभी मिलकर कोरोना मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का काम करे। इतना दवाब हम बर्दास्त नहीं कर पा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि हम किसी पर दवाब नहीं दे सकते। सरकारी अस्पतालों के एंबुलेंस कोरोना मरीजों के लिए काम कर रहे हैं। गैरसरकारी अस्पताल हो या क्लब सभी को इस नाजुक मौके पर आगे आना चाहिए। तभी हम कोरोना पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

सबसे बड़ी बात है कि यह समय कोरोना से भागने का नहीं है, मुकाबला करने का है। गैरसरकारी हो या सरकारी या फिर निजी क्लबों के एंबुलेंस सभी को इस बुरे वक्त में कोरोना मरीजों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।

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