लॉकडाउन में बीएसएफ ने बांग्लादेश सीमा से पकड़े 107 तस्कर, 5.74 करोड़ मूल्य के सामान भी जब्त


कोरोना को लेकर देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ के जवानों ने कई चुनौतियों का सामना करते हुए तस्करी व घुसपैठ पर नकेल कस कर रख दिया। 24 मार्च से 14 जून के बीच लॉकडाउन के दौरान करीब ढाई महीने की अवधि में बीएसएफ के दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के जवानों ने बंगाल के सीमावर्ती जिलों में तस्करी की 630 घटनाओं को नाकाम किया है। इस अवधि में 107 तस्करों को गिरफ्तार किया गया एवं करीब 5.74 करोड़ रुपये मूल्य के सामान जब्त किए गए।

इसमें सबसे अधिक फेंसिडिल कफ सिरप की 54,485 बोतलें, 704 किलो गांजा, 11,471 पीस याबा टैबलेट, 6.7 किलो ड्रग्स, 300 मवेशी, साढ़े 5 किलो सोना आदि शामिल है। इन सामानों की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के जरिए तस्करी की कोशिश की जा रही थी। फेंसिडिल व याबा टैबलेट का बांग्लादेश में लोग नशे के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इससे पहले वर्ष 2019 की समान अवधि में दक्षिण बंगाल फ्रंटियर ने तस्करी की 1458 एवं 2018 में 1248 घटनाओं को नाकाम किया था। इस दौरान 2019 की उक्त अवधि में 12.69 करोड़ के सामान एवं 2018 में 11.21 करोड़ मूल्य के सामानों को जब्त किया था। बीएसएफ के दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के डीआइजी व वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी सुरजीत सिंह गुलेरिया ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान सभी प्रकार की तस्करी काफी कम हुई है। उन्होंने कहा कि सीमा पर निगरानी बढ़ाए जाने व बीएसएफ की मुस्तैदी की वजह से तस्करी को रोकने में कामयाबी मिली है। सोने की तस्करी बिल्कुल नहीं हुई। मवेशियों की तस्करी पर भी हमने पूरी तरह लगाम लगा दिया। मानव तस्करी भी बंद हो गई है। गुलेरिया ने बताया कि तस्करों ने लॉकडाउन के दौरान चकमा देने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए व नए-नए तरीके से तस्करी की कोशिश की लेकिन हमारे जवानों की निगाह से वे बच नहीं पाए। उन्होंने इसके पीछे दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के नेतृत्व क्षमता व निगरानी बढ़ाए जाने को इसका श्रेय दिया।

दरअसल, दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के महानिरीक्षक के रूप में योगेश बहादुर खुरानिया (आइपीएस) ने जब से कमान संभाली है अपने फ्रंटियर इलाके में तस्करी व घुसपैठ की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगा रखा है। बता दें कि बंगाल से लगी बांग्लादेश की सीमा दशकों से तस्करी और घुसपैठ के लिए कुख्यात रही है और यह राज्य में राजनीतिक रूप से भी एक ज्वलंत मुद्दा रहा है।

गुलेरिया ने दावा किया कि दक्षिण बंगाल सीमांत क्षेत्र में तस्करी, मवेशियों व जाली नोटों का कारोबार और घुसपैठ अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। उल्लेखनीय है कि बंगाल से बांग्लादेश की 2216 किलोमीटर सीमा लगती है जिनमें से 913 किलोमीटर अंतर्राष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा का जिम्मा दक्षिण बंगाल फ्रंटियर पर है। बंगाल के पांच सीमावर्ती जिले- मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर व दक्षिण 24 परगना एवं नदिया इससे लगती है और यह सीमा इलाका अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण बेहद दुर्गम व इसकी सुरक्षा बहुत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। 

सिर्फ फेंसिडिल की तस्करी बढी

बीएसएफ डीआइजी गुलेरिया ने बताया कि बांग्लादेश सीमा पर जहां सभी प्रकार की तस्करी कम हुई है, वहीं फेंसिडिल की तस्करी में बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे उन्होंने भौगोलिक स्थिति एवं दूसरे धंधे में शामिल तस्करों के इस धंधे में शिफ्ट हो जाने को जिम्मेदार बताया।‌ दरअसल बांग्लादेश में शराब पर पाबंदी है इसीलिए फेंसिडिल दवा की तस्करी बांग्लादेश में की जाती है। इसी वजह से बांग्लादेश में यह दवा प्रतिबंधित है जबकि भारत में सिर्फ इसे बतौर दवा इस्तेमाल करने की इजाजत है। गुलेरिया ने बताया कि जिस तरह से शराब पीने के लोग आदि होते हैं उसी तरह बांग्लादेश में इसको पीने के लोग आदि हैं।

वहीं, लॉकडाउन में वहां भी लोग घरों में बैठे हुए हैं तो उन्होंने इसकी ज्यादा डिमांड की इसलिए इसकी तस्करी बढी। गुलेरिया ने साथ ही कहा कि हमने बॉर्डर के ऊपर निगरानी काफी बढ़ा दी इसलिए ज्यादा फेंसिडिल भी पकड़ी गई। इसके अलावा उन्होंने कहा कि चूंकि पशु तस्करी पर लगाम लगाया जा चुका है ऐसे में उस धंधे में शामिल ज्यादातर लोग भी फेंसिडिल के धंधे में शिफ्ट हो गए हैं, क्योंकि इसमें प्रॉफिट ज्यादा है। यहां इसका दाम एक सौ से डेढ़ सौ रुपये है जबकि बांग्लादेश में इसका दाम 1000 से 1200 रुपये तक हो जाती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश की सीमा के बीच कई ऐसे गांव हैं जो जीरो लाइन पर बसी है। तार के दोनों तरफ घर हैं। इन इलाकों में स्थानीय नागरिक अपनी जरूरत का सामान लेने के लिए अंदरूनी हिस्सों में आते -जाते हैं और तस्कर इन स्थानीय नागरिकों की ऐसी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें तस्करी का हथियार बनाते हैं और उनके साथ फेंसिडिल की बोतलें बांग्लादेश भेजने की कोशिश करते हैं।

ऐसे में लोग किसी न किसी तरह से दो- दो, चार- चार बोतल भी छिपा कर ले जाने का प्रयास करते हैं। हालांकि उन्होंने दावा किया कि सबसे ज्यादा हमने फेंसिडिल की तस्करी ही पकड़ी है और यह बीएसएफ की मुस्तैदी को दर्शाता है। गुलेरिया ने बताया कि इस साल अब तक बांग्लादेश सीमा से दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के जवानों ने 1.29 लाख से अधिक फेंसिडिल की बोतलें जब्त करने में सफलता हासिल की है। इससे पहले 2019 में करीब दो लाख फेंसिडिल की बोतलें जब्त की गई थी।

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