बेरोजगारी भत्ता देने के नाम पर झारखंड में शुरू हो गई ठगी, भेज रहे वेबसाइट के लिंक; इसे पढ़ें-झांसे में न आएं


राज्य के बेरोजगारों को भत्ता देने के लिए मुख्यमंत्री बेरोजगार प्रोत्साहन योजना की सक्षम स्तर पर मंजूरी नहीं मिलने से यह योजना अभी शुरू ही नहीं हो पाई है, लेकिन कई वेबसाइट्स इस योजना के शुरू होने का हवाला देकर युवाओं के बीच भ्रम फैला रही हैं। ऐसी वेबसाइट्स योजना को लेकर कई तरह की गलत जानकारियां भी परोस रही हैं। साथ ही इस योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के लिए झारखंड सरकार का लिंक दे रही हैं जो इस योजना के लिए है ही नहीं।

वेबसाइट्स पर इस योजना से संबंधित एक आलेख होता है जिसे पूरा पढऩे को कहा जाता है। अंत में इस योजना का लाभ लेने हेतु ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए एक लिंक दिया जाता है जो दरअसल झारखंड सरकार के नियोजनालयों में निबंधन मात्र के लिए है, न कि बेरोजगारी भत्ता के लिए। इस योजना की अर्हता और इसके लिए जमा किए जानेवाले आवश्यक दस्तावेज अभी तय ही नहीं है, लेकिन वेबसाइट्स इसकी भी जानकारी दे रही हैं।

हकीकत यह है कि उक्त दस्तावेज नियोजनालयों में निबंधन के लिए मांगे जाते हैं। वेबसाइट्स पर बताया जा रहा है कि बेरोजगारों को पांच से सात हजार रुपये मासिक भत्ता मिलेगा, जबकि यह सालाना मिलना है। यह भी कहा जा रहा है कि यह भत्ता तबतक मिलेगा जबतक किसी युवा को रोजगार नहीं मिल जाता, जबकि बजट प्रावधान में दो वर्ष तक ही इस योजना का लाभ मिलने की बात कही गई है।

विभाग के एक पदाधिकारी के अनुसार, यह योजना शुरू ही नहीं है तो इसके लिए ऑनलाइन फार्म भरने की बात ही नहीं उठती। यह योजना शुरू होने पर इसके लिए अलग से फार्म भरा जाएगा। युवा नौकरी की तलाश में नेट पर सर्च करते रहते हैं। उन्हें अपनी साइट्स पर आकर्षित करने के लिए ये वेबसाइट्स ऐसा कर रही हैं। हालांकि अभी तक कहीं से किसी तरह की ठगी की शिकायत नहीं मिली है, बावजूद भ्रामक जानकारी से बचना चाहिए। बता दें कि योजना एवं प्राधिकृत समिति कोविड-19 का हवाला देते हुए इसका प्रस्ताव ही विभाग को वापस लौटा दिया है। 

वेबसाइट्स इस तरह की भ्रामक सूचना दे रहे हैं तो यह गलत है। यह योजना अभी शुरू ही नहीं हुई है। अभी इसकी रूपरेखा ही तय की जा रही है। युवा इस तरह की भ्रामक सूचना से बचें।

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