केंद्रीय दल ने किया दक्षिण 24 परगना के चक्रवात प्रभावित इलाकों का दौरा


कोलकाता: केंद्र सरकार के एक दल ने चक्रवात ‘अम्फान’ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए दक्षिण 24 परगना जिले के चक्रवात प्रभावित इलाके का दौरा किया और ग्रामीणों से बातचीत की। यह दल कतानदिघि -रायदिघी के कुछ इलाकों में गया तथा उसने ग्रामीणों से राहत सामग्री की उपलब्धता तथा कृषि एवं संपत्ति को हुए नुकसान के बारे में लोगों की बातें सुनीं।एक ग्रामीण ने टूटी-फूटी हिंदी में कहा, ‘‘कृपया आप यह सुनिश्चित कीजिए कि हमें और तिरपाल मिलें। हम मुश्किल घड़ी में रह रहे हैं। कई मकान क्षतिग्रस्त हो गये हैं और खेत तबाह हो गये।’’ केंद्रीय अधिकारियों के साथ स्थानीय प्रखंड विकास अधिकारी और पंचायत सदस्य थे। 

स्थानीय ग्रामीण बरूण दास ने कहा, ‘‘ वे असली स्थिति देखने अंदरूनी हिस्सों में गये भी नहीं। उनका काफिला राजमार्ग पर ही रूका और कुछ देर के लिए वे उतरकर आसपास के क्षेत्र में गये एवं फिर लौट आये। वे नजदीक के उस स्थान पर नहीं गये जहां मिट्टी का तटबंध टूट गया और पूरा इलाका जलमग्न हो गया। ऐसे दौरे का क्या मतलब है?’’ गृहमंत्रालय में संयुक्त सचिव (साइबर एवं सूचना सुरक्षा) अनुज शर्मा की अगुवाई में शुक्रवार को इस दल ने दो समूहों में बंटकर दक्षिण 24 परगना के पठारप्रतिमा और उत्तरी 24 परगना के संदेशखाली इलाके का दौरा किया। यह दल पश्चिम बंगाल में बृहस्पतिवार शाम को तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचा था। शुक्रवार को जब यह दल उत्तरी 24 परगना जिले के मिनाखा और मलंचा प्रखंडों में पहुंचा था तब उसे लोगों ने तख्तियां दिखायी थीं जिन पर लिखा था कि उन्हें पर्याप्त राहत नहीं मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मई को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ उत्तरी 24 परगना जिले के बासिरहाट का दौरा किया था। इस दौरे के बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल के लिए 1000 करोड़ रूपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी। केंद्रीय दल के एक सदस्य ने कहा, ‘‘ हमने स्थानीय लोगों से जो बातचीत की उसमें हम हर चीज का विस्तार से संज्ञान ले रहे हैं। हमें जो कुछ कहना है, हम उसका जिक्र अपनी रिपोर्ट में करेंगे।’’ 

एक अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय दल दिल्ली लौटने से पहले मुख्य सचिव राजीव सिन्हा एवं राज्य के अन्य वरिष्ठ अधकारियों से मिलेगा तथा उसका विपक्षी भाजपा, कांग्रेस और माकपा नेताओं से भी मिलने का कार्यक्रम है। चक्रवात अम्फान से दक्षिण बगाल के कई जिलों में 98 लोग मर गये थे और संपत्ति का बड़ा नुकसान हुआ था।

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