हर साल की रथयात्रा से कैसे अलग है इस बार भगवान जगन्नाथ का अनुष्ठान


कोरोना संकट के बीच आज भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकल रही है. इस बार भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पिछले कई सालों से काफी अलग है. भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम की रथयात्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की मौजूदगी नहीं है. पुरी में कल रात 9 बजे से ही कर्फ्यू लागू कर दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुरी के सभी एंट्री प्वाइंट को सील कर दिया गया है. आजतक से खास बातचीत में एक श्रद्धालु ने कहा कि यह पहला मौका है, जब हम लोग रथयात्रा में शामिल नहीं होंगे, लेकिन मैं खुश हूं कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जा रही है. श्रद्धालु यह कहते हुए रोने लगा.

जानिए इस बार कैसे अलग है रथयात्रा

- रथयात्रा को इजाजत देने का आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पुरी में रथ यात्रा से पहले हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, हाईवे, सहित शहर में एंट्री के सभी रास्ते बंद कर दिए जाएं.

- इसके साथ ही तीनों रथ को खींचने के लिए प्रति रथ 500 से ज्यादा लोग नहीं होने चाहिए. रथ के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाए.

- रथ यात्रा दौरान पारंपरिक अनुष्ठान में भी सिर्फ जरूरी लोगों को इजाजत होगी. इनमें मंदिर कमेटी वाले पंडे, अधिकारी और पुलिसकर्मी शामिल हैं. रथ यात्रा में वही शामिल होगा, जिसकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होगी.

- शर्तों और अन्य मानदंडों के अनुसार, रथ यात्रा के संचालन की प्राथमिक जिम्मेदारी जगन्नाथ मंदिर प्रशासन समिति के प्रभारी की होगी. इसके अलावा रथ यात्रा के संचालन के लिए राज्य सरकार द्वारा नामित अफसर भी इसी तरह जिम्मेदार होंगे.

- अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की यात्रा मंदिर परिसर में ही निकाली जा रही है. मंदिर के अंदर 10-10 की संख्या में श्रद्धालु रथयात्रा का दर्शन कर सकते हैं.

- अहमदाबाद में सीएम विजय रूपाणी ने पारंपरिक सोने के झाड़ू से झाड़ू लगाकर यात्रा की शुरुआत की, लेकिन इस दौरान सिर्फ मंदिर के पुजारी और कर्मचारी ही मौजूद रहे.

- कोलकाता में पहली बार भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा ट्रक पर निकाली जा रही है.

- पश्चिम बंगाल में पहली बार रथयात्रा के मौके पर सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया गया है.

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