ममता बोलीं- केवल 'बड़ा सा जीरो' है केंद्र का 20 लाख करोड़ का विशेष आर्थिक पैकेज, राज्‍यों के लिए कुछ नहीं




पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को केंद्र सरकार पर हमला करते हुए दावा किया कि केंद्र के विशेष आर्थिक पैकेज में राज्यों की मदद के लिए कुछ नहीं है और वह महज ‘एक बड़ा शून्य’ है। बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कोविड-19 संकट के दौरान लोगों को गुमराह कर रही है।


उन्‍होंने बुधवार को एक प्रेस ब्रीफ में कहा, 'केंद्र सरकार ने जिस विशेष आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है वह कुछ नहीं बल्कि एक बड़ा सा जीरो है। यह लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश है। उसमें असंगठित क्षेत्र, सार्वजनिक व्यय और रोजगार सृजन के लिए कुछ नहीं है।’


'वित्‍त मंत्री के ऐलान से उम्‍मीद टूटी'

ममता ने कहा, ‘कल जब प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ रूपये के पैकेज की घोषणा की थी तब हम आशान्वित थे कि राज्यों के हितों का भी ख्याल रखा जाएगा, एफआरबीएम (राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन) सीमा बढ़ाई जाएगी। लेकिन आज केंद्रीय वित्त मंत्री की घोषणा के बाद पाया गया कि कल जो कुछ कहा गया था वह एक झांसा था।’ धनाभाव से जूझ रहे राज्यों को कुछ नहीं देने पर केंद्र पर प्रहार करते हुए तृणमूल कांग्रेस नेता ने दावा किया कि वह सहकारी संघवाद को ध्वस्त करने की कोशिश कर रहा है।


'बीजेपी शासित राज्‍यों की तरह नहीं बदलेंगे श्रम कानून'

ममता ने बीजेपी शासित राज्‍यों पर तंज कसते हुए कहा, 'हमें खबर मिली हे कि कुछ बीजेपी शासित राज्‍य अपने यहां या तो श्रम कानून निलंबित कर रहे हैं या फिर उनमें कुछ बदलाव कर रहे हैं। इन राज्‍यों में काम करने वाले कर्मचारियों और मजदूरों को पहले की तुलना में ज्‍यादा काम करना होगा और उन्‍हें कम पैसा मिलेगा, वहां जॉब सिक्‍युरिटी भी नहीं होगी। लेकिन हम इसका समर्थन नहीं करते और ऐसा कदम कभी नहीं उठाएंगे।' हाल ही में बीजेपी शासित मध्‍य प्रदेश और यूपी ने कुछ श्रम कानूनों को इस लिहाज से कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया है ताकि कोरोना की चोट से उबरने वाले बिजनेस को मदद मिल सके।


'एक बस में 20 से ज्‍यादा सफर न करें'

पश्चिम बंगाल में सरकारी बसों के इस्‍तेमाल पर ममता बनर्जी ने जनता से अपील कि कि वे एक बस में 20 से ज्‍यादा की संख्‍या में सफर न करें और सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन करें।



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