मजदूरों की घर वापसी पर सियासत, सुशील मोदी ने बतायी ट्रेन की जरूरत, तेजस्वी बोले- 2000 बसें देने को तैयार


बिहार में चुनावी साल है. ऐसे में दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों पर सियासत शुरू हो गई है. अपने गांव लौटने का सपना देखने वालों के लिए राह इतनी आसान नहीं होगी.

केंद्र सरकार ने दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को लाने की इजाजत दी है. नई गाइडलाइंस में बसों के जरिए लोगों को लाने की छूट है लेकिन इन्हीं बसों को लेकर बिहार में सियासत शुरू हो रही है. नीतीश सरकार विशेष ट्रेन चलाने की मांग कर रही है तो विपक्ष के नेता अपनी तरफ से बस देने का ऐलान कर रहे हैं. दूसरे राज्यों में फंसे कितने लोग बिहार वापस लौटना चाहते हैं इसके लिए सरकार उन आवेदनों को आधार मान रही है जिन्होंने आर्थिक मदद के लिए अप्लाई किया है.


अब तक कुल 27 लाख लोगों ने मुख्यमंत्री से सहायता के लिए आवेदन किया है. इनमें दिल्ली से 5 लाख, महाराष्ट्र से 2 लाख 68 हजार, कर्नाटक से 1 लाख से ज्यादा, गुजरात से 2 लाख से ज्यादा लोगों के आवेदन आए हैं.
अगर 27 लाख लोग वापस लौटना चाहते हैं तो बसों से घर वापसी में क्या परेशानी है? इसपर बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा, ''जितनी बड़ी संख्या में लोग चेन्नई में, बेंगलुरू में, मुंबई में रुके हुए हैं उन्हें बसों से लाना संभव नहीं है. एक एक बस को 6 से 7 दिन लग जाएंगे. इसलिए मैं भारत सरकार से अपील करना चाहूंगा कि विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की जाए. क्योंकि बिना स्पेशन ट्रेन की व्यवस्था के बसों से लाना संभव नहीं होगा. इसमें एक महीनों लग जाएगा.''


तेजस्वी यादव का सियासी दांव

सरकार ने बसों का रोना रोया तो तेजस्वी यादव ने सियासी दांव चलने में देर नहीं की. तेजस्वी ने ट्वीट कर कहा, "हम सरकार को 2000 बसें देने को तैयार हैं. सरकार नोडल और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में इन बसों का प्रयोग कर सकती है. बसें पटना में कब भेजनी है, बताया जाए."

बिहार में साल चुनावी है लिहाजा बस के बहाने सरकार को सियासी तौर पर बेबस करने में पप्पू यादव भी पीछे नहीं रहे. बिहार के मधेपुरा के पूर्व सांसद राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा, "बिहार सरकार के पास पैसा नहीं है. मैं तन-मन-धन से हर बिहारी को बिहार वापस लाने को प्रतिबद्ध हूं. कोटा से छात्रों को लाने हेतु वहां 30 बस भेज दी है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी से आग्रह है कि वह बस सेनेटाइज करवा कर, छात्रों की सुरक्षित यात्रा का इंतजाम सुनिश्चित कराएं."

बिहार सरकार ने की हाई लेवल बैठक

सरकार ने लोगों की घर वापसी के लिए 19 नोडल अफसरों के नाम जारी कर दिए हैं. सीएम नीतीश कुमार ने एक हाईलेवल बैठक कर पूरी तैयारी का जायजा लिया. बैठक में अधिकारियों के साथ कोविड-19 के संबंध में स्थिति की जानकारी ली और कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की. समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री को जानकारी देते हुये बताया कि राज्य के बाहर से आने वाले लोगों की पहले स्क्रीनिंग कराई जाएगी, उसके बाद उन्हें उनके जिले तक पहुंचाकर 21 दिन तक क्वॉरंटीन सेंटर में रखा जाएगा.


नीतीश सरकार की मांग को पंजाब सरकार की प्रधानमंत्री को लिखी उस चिट्ठी से समर्थन मिला है जिसमें उन्होंने यूपी, बिहार और झारखंड के दस लाख मजदूरों को भेजने के लिए ट्रेन चलाने की मांग की है.