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West Bengal: ईस्ट-वेस्ट मेट्रो के उद्घाटन समारोह में नहीं बुलाने से ममता बनर्जी क्षुब्ध


ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना के प्रथम चरण के उद्घाटन समारोह में आमंत्रित नहीं किए से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी क्षुब्ध हैं. उद्घाटन के एक दिन बाद शुक्रवार को उन्होंने इसपर एतराज जताते हुए कहा कि जब वह रेलमंत्री थीं, तब उनकी टीम को इस परियोजना को मंजूरी दिलाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े थे और फंड जुटाने में आंसू निकले थे. शुक्रवार को विधानसभा में बजट सत्र में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा-'जब मैं यूपीए सरकार में थी. ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना के लिए फंड इकट्ठा करने में आंखों से आंसू निकल गए थे. मुझे मीडिया में तस्वीर नहीं चाहिए लेकिन रेल मंत्रालय इसकी सूचना तो दे ही सकता था.'

गौरतलब है कि सीएए-एनआरसी सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र-राज्य के रिश्ते में चल रही कड़वाहट के बीच गुरुवार को सॉल्टलेक में ईस्ट-वेस्ट मेट्रो के पहले चरण का रेलमंत्री पीयूष गोयल ने उद्घाटन किया था. समारोह में राज्य के अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस और बारासात की तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार को आमंत्रित किया गया लेकिन आमंत्रण पत्र से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम नहीं था. इससे नाराज तृणमूल सांसदों व विधायकों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया. सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा-'ममता बनर्जी जब 2009-2011 में रेलमंत्री थीं, तब ईस्ट वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर उन्हीं का मौलिक विचार था. उन्होंने ही रेलवे बजट में इसके लिए धन आवंटित किया था. अब जब परियोजना का उद्घाटन हुआ तो उन्हें आमंत्रित ही नहीं किया गया. यह बंगाल की जनता का अपमान है। इसी कारण हमने कार्यक्रम का बहिष्कार किया.'

दूसरी ओर मेट्रो रेलवे ने सफाई दी है कि पहले पत्र भेजकर मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया गया था. बाद में अधिकारी भेजकर मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया गया, बावजूद इसके वह कार्यक्रम में नहीं आईं.

कोलकाता के मेयर व शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने इसे केंद्र सरकार की अभद्रता करार दिया जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद दिलीप घोष ने कहा था कि 2009 में रेल मंत्री रहते ममता बनर्जी ने भी तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को आमंत्रित नहीं किया था. जैसे को तैसा तो मिलना ही चाहिए.

ममता ने दिलाई माकपा नेताओं को उनके 34 वर्षों के शासन की याद

कलकत्ता विश्वविद्यालय (विवि) और दुर्गापुर में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष को सभा करने की अनुमति नहीं देने पर शुक्रवार को विधानसभा में माकपा विधायकों ने खूब हंगामा किया. वाममोर्चा विधायक दल के नेता व माकपा विधायक सुजन चक्रवर्ती ने इस मुद्दे पर तृणमूल सरकार की कड़ी आलोचना की, जिसपर सदन में मौजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तत्काल उन्हें कड़ा जवाब दे दिया. उन्होंने वामपंथी विधायकों की ओर देखते हुए पूछा-'34 वर्षो के शासनकाल के दौरान किए गए अत्याचार याद हैं कि सब भूल गए? हाजरा की घटना तो याद होगी ही, जहां मेरे ऊपर जानलेवा हमला करवाया गया था. आप लोगों ने कम अत्याचार नहीं किए हैं. मैंने तो उस मुकाबले कुछ भी नहीं किया.' गौरतलब है कि कांग्रेस में रहते ममता बनर्जी के सिर पर हाजरा में आंदोलन के दौरान लालू आलम नामक माकपा समर्थक ने जोरदार वार किया था. ममता को गंभीर चोट आई थीं.

वाम विधायकों ने जब शुक्रवार को सदन में सारधा चिटफंड घोटाले को लेकर सवाल किया तो ममता ने करारा जवाब देते हुए कहा-'सीबीआइ ने अब तक किसी भी माकपा नेता को गिरफ्तार नहीं किया है जबकि चिटफंड का यह गोरखधंधा वामो के शासनकाल में ही फला-फूला था. सभी को पता है कि भाजपा-माकपा मिलकर काम कर रही हैं.'

कांग्रेस पर जमकर हमला

बंगाल के राजनीतिक दलों पर राजनीतिक प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाते हुए ममता ने माकपा और कांग्रेस के भाजपा के सामने कथित तौर पर राजनीतिक रूप से हथियार डाल देने की आलोचना की. उन्होंने कहा-'कांग्रेस जितना माकपा के करीब जाएगी, वह उतना ही अपना महत्व गंवाएगी. जहां भी क्षेत्रीय दल मजबूत हैं, वहां सही मायने में कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं है.' ममता ने यह भी कहा कि वह अन्य मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर उनसे एनपीआर की प्रक्रिया शुरू नहीं करने की अपील करेंगी, क्योंकि यह एनआरसी की 'पूर्वपीठिका' है.

बंगाल को बिहार या उत्तर प्रदेश ना समझें

भाजपा विधायक दल के नेता मनोज टिग्गा द्वारा तृणमूल सरकार की आलोचना करने पर मुख्यमंत्री ने उन्हें भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा-' बंगाल को बिहार या उत्तर प्रदेश ना समझे. यहां सभी भाईचारे के साथ मिलकर रहते हैं। बंगाल में किसी तरह की ¨हसा फैलाने की कोशिश न करें.'

ममता को आईशी का जवाब

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा वाममोर्चा के शासनकाल की आलोचना करने का शुक्रवार को जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष ने जवाब दिया. उन्होंने कहा-'जब वाममोर्चा ने 34 साल में कुछ नहीं किया, तभी तो तृणमूल सरकार सत्ता में आई. यह समय आपस में नहीं, बल्कि भाजपा-आरएसएस के खिलाफ लड़ने का है. सभी को एकजुट होकर उनके खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी.'