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'दादा परंपरा' का जिक्र आया तो गावस्कर बोले- जब हम जीते तो विराट पैदा भी नहीं हुए थे


India vs Bangladesh Day-Night Test: इसमें कोई शक नहीं कि इस समय भारतीय टेस्ट टीम शानदार प्रदर्शन कर रही है और उसने इस साल ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में पहली बार टेस्ट सीरीज में मात दी थी. घर में तो हमेशा ही भारत का प्रदर्शन शानदार रहा है, लेकिन टीम इंडिया के इतिहास को पेश करने में भारतीय कप्तान विराट कोहली और पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर आमने-सामने आ गए. गुलाबी टेस्ट में बांग्लादेश को हराने के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में कोहली ने कहा कि यह परंपरा दादा (सौरव गांगुली) ने शुरू की थी, जिसे हम आगे बढ़ा रहे हैं.

दरअसल, संजय मांजरेकर ने विराट से यहां भारतीय तेज गेंदबाजों द्वारा करारे बाउंसर्स को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, "हमारा एक मंत्र है कि हमें खुद को मैदान में स्थापित करना है. हम सभी जानते हैं कि टेस्ट क्रिकेट मानसिक लड़ाई है. मेरा मतलब है कि पहले कोई भी बल्लेबाजों को चोटिल करना नहीं चाहता था. यह सिर्फ इतना ही होता था कि हम बल्लेबाजों के जेहन में घुस जाएं और उन्हें आउट करें और ऐसा ही हुआ, लेकिन अब हमने खड़ा होना सीख लिया है.

"यह सब कुछ दादा (सौरव गांगुली) के जमाने में शुरू हुआ था, जिसे हम अब आगे बढ़ा रहे हैं। अब हमारा गेंदबाजी आक्रमण बेखौफ है और उन्हें अपने ऊपर भरपूर विश्वास है. वह किसी भी बल्लेबाज के सामने खेलने को तैयार हैं. हमने बीते तीन से चार साल में जो भी मेहनत की है अब हम उसका फल काट रहे हैं. जब एक टीम तैयार हो रही होती है, तब बहुत कुछ कहने की जरूरत होती है. अब हमारे खिलाड़ी जानते हैं कि उन्हें क्या करना है।" ये बात विराट कोहली ने प्रजेंटेशन सेरेमनी में आगे कही.

सुनील गावस्कर ने याद दिलाईं अपने समय की उपलब्धियां

इस सम्मान समारोह से 30 गज दूर खड़े सुनील गावस्कर इसको सुन रहे थे. सम्मान समारोह के बाद जब गावस्कर से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दादा इस समय बीसीसीआइ अध्यक्ष हैं तो मैं समझ सकता हूं कि उनकी तारीफ की ही जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह सब 2000 (गांगुली बांग्लादेश के खिलाफ कप्तान बने) के बाद शुरू हुआ। 1970-71 में भारतीय टीम वेस्टइंडीज जाकर वहां पांच मैचों की सीरीज में 1-0 से जीतकर आई थी.

1971 में इंग्लैंड को उसके घर में तीन मैचों की सीरीज में 1-0 से हराया था. 1975-76 में न्यूजीलैंड में जाकर 1-1 से ड्रॉ खेला था. विराट को शायद यह पता नहीं होगा। विराट उस समय पैदा भी नहीं हुए थे. 1980-81 में ऑस्ट्रेलिया में तीन मैचों की सीरीज 1-1 से ड्रॉ खेली. 1986 में इंग्लैंड को उसके घर में तीन मैचों की सीरीज में 2-0 से हराया. तो ऐसा नहीं है कि सब कुछ 2000 के बाद ही शुरू हुआ. पिछली सदी के आठवें और नौवें दशक में भी भारतीय टीम ने आक्रामता के साथ अच्छा खेल दिखाया था.