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खुलासा: बिहार के मिड डे मील में मौसमी फल के बदले मिलता है खीरे का टुकड़ा


उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में मिड डे मील में बच्चों को रोटी नमक खिलाने पर मचे बवाल के बाद आजतक ने पटना के एक सरकारी स्कूल का दौरा किया और पाया कि हालात भले ही यहां मिर्जापुर के स्कूल जैसे बुरे नहीं है मगर कुछ अच्छे भी नहीं है.

मिड डे मील की हकीकत जानने के लिए आजतक की टीम बुधवार को पटना के पुनाइचाक में स्थित बालक-बालिका मध्य विद्यालय पर पहुंची. मेन्यु के हिसाब से स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को आज के दिन खिचड़ी, चोखा और एक मौसमी फल खिलाने का निर्देश है.

आजतक जब इस स्कूल पर पहुंचा तो पाया गया कि यहां पर बच्चों को खिचड़ी खिलाने की व्यवस्था तो हो रही थी मगर जहां तक मौसमी फल खिलाने की बात है, वहां पर मौसमी फल के नाम पर हर बच्चे को खीरे का कुछ टुकड़ा परोसा जा रहा था.

इस स्कूल के हेडमास्टर संजीव कुमार सिंह ने बताया कि सरकार के मिड डे मील योजना के तहत पहली से 5वी तक पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे के ऊपर सरकार 4 रुपये और 48 पैसे देती है. इतने पैसे में हर बच्चे को एक मौसमी फल खिलाना संभव नहीं है, वह भी तब जब बाजार में फलों की कीमतें आसमान छू रही हैं.

हेडमास्टर संजीव कुमार सिंह ने बताया कि 5वी से 8वीं तक के बच्चों के लिए सरकार प्रत्येक बच्चे पर 6 रुपये और 71 पैसे देती है और यह रकम भी पर्याप्त नहीं है.

गौरतलब है, पुनाइचाक के सरकारी स्कूल में 4 रसोइयों की व्यवस्था है और मिड डे मील योजना के तहत हर एक रसोइए को मासिक 1250 रुपये वेतन दिया जाता है.

पटना के इस सरकारी स्कूल का दौरा करने के बाद एक बात तो स्पष्ट हो गई कि जब राजधानी में बच्चों को पहले से निर्धारित मेन्यु के हिसाब से भोजन नहीं कराया जाता है तो अन्य जिलों में भी हालात कुछ ज्यादा अच्छे नहीं होंगे.