कार्डियोलॉजिकल सोसाईटी आफ इंडिया, बिहार चैप्टर 32वाँ वार्षिक अधिवेशन, CARDICON 2026 का दो दिवसीय आयोजन


'Prevention to Intervention' थीम पर हृदय रोगों की रोकथाम, जुटे देश के प्रख्यात कार्डियोलॉजिस्ट

पटना:कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (CSI), बिहार चैप्टर का 32वाँ वार्षिक अधिवेशन 'CARDICON 2026' शनिवार को पटना के होटल मौर्या में प्रारंभ हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित कार्डियोलॉजिस्ट एवं कार्डियक सर्जनों ने भाग लिया।


इस वर्ष सम्मेलन की थीम 'Prevention to Intervention' रखी गई है।


सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्रों का शुभारंभ CSI बिहार चैप्टर के अध्यक्ष एवं एम्स पटना के CTVS विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार के नेतृत्व में हुआ। शाम 4 बजे बिहार सरकार के माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत कुमार जी ने दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का औपचारिक उ‌द्घाटन किया और कहा कि यह सम्मेलन उन्नत चिकित्सा पद्धतियों पर सार्थक विमर्श का एक उत्कृष्ट मंच सिद्ध होगा ऐसी आशा है। साथ ही मंत्री महोदय ने कहा कि बिहार सरकार स्वास्थ्य की जानकारी के लिए डोर टू डोर कैम्पेन कर रही है जिसमें हृदय रोगों की गणना भी की जाएगी और इसके लिए सरकार हृदय रोगों की व्यापकता की गणना करेगी और उपलब्ध चिकित्सालय एवं चिकित्सा सुविधाओं का अवलोकन कर ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं राज्य के हर एक भाग में व्यवस्थित करेगी।


स्वास्थ्य मंत्री ने आयोजन के लिए CSI बिहार चैप्टर को बधाई देते हुए कहा कि युवाओं में हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर एवं अचानक हृदय गति रुकने की बढ़ती घटनाएँ गंभीर चिंता का विषय हैं। हृदय रोगों से निपटने के लिए समय पर पहचान, रोकथाम, स्वस्थ जीवनशैली और जन-जागरुकता अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना एवं मुख्यमंत्री सहायता कोष के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को उपचार हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया।


अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. संजीव कुमार ने बिहार में हृदय रोगों की रोकथाम, उपचार एवं चिकित्सा सुविधाओं के समेकित विकास के लिए 'Cardiology Commission of Bihar' (बिहार हृदय रोग आयोग) के गठन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इस आयोग के माध्यम से उच्चस्तरीय चिकित्सा शिक्षा, आधुनिक उपकरणों, अस्पतालों के बुनियादी ढाँचे और चिकित्सा सुविधाओं की निगरानी सुनिश्चित की जा सकती है, ताकि उन्नत हृदय चिकित्सा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।


उ‌द्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजू अग्रवाल, IGIC के निदेशक डॉ. सुनील कुमार, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कमलेश ठाकुर, रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. सत्यजीत कुमार सिंह तथा पीएमसीएच के चिकित्सा अधीक्षक


राजीव कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य चिकित्सक उपस्थित रहे। आयोजन सचिव डॉ. विपिन कुमार ने स्वास्थ्य मंत्री एवं सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।


वैज्ञानिक सत्रों में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर चर्चा


पहले दिन के वैज्ञानिक सत्रों में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने हृदय रोगों के निदान एवं उपचार के नवीनतम तरीकों पर व्याख्यान दिए। इनमें मौलाना आजाद मेडिकल कालेज नई दिल्ली के डॉ. मोहित गुप्ता, विल्लोर के डॉ. जैकब जोश, एम्स नई दिल्ली के डॉ. रामकृष्णन और डॉ. राकेश यादव, वाराणसी के डॉ. आशीष जायसवाल, श्री चित्रा इंस्टीट्यूट त्रिवेंद्रम के डॉ. दीपा एस. कुमार, हैदराबाद के डॉ. कुमार नारायण, बैंगलूरु की डॉ. आई.बी. विजयलक्ष्मी और डॉ. सी. एस. हीरामय, मुंबई के डॉ. अनूप आर. तकसांडे और नई दिल्ली के डॉ. विवेका कुमार और डॉ. एस.के. सिन्हा, कोलकाता के डॉ. दिलीप कुमार और डॉ. सुमित्रा राय, एवं सहित अनेक विशेषज्ञ शामिल रहे।


प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद कुमार ने एंजियोप्लास्टी की नवीनतम तकनीकों एवं जटिल मामलों के प्रबंधन पर चर्चा करते हुए बताया कि आधुनिक तकनीकों से अब लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी जैसे गंभीर ब्लॉकेज में भी एंजियोप्लास्टी द्वारा मरीजों की जान बचाना संभव हो रहा है। डॉ. बी.बी. भारती ने एंजियोप्लास्टी के दौरान कैथेटर के सही चयन एवं पोजिशनिंग के महत्व पर प्रकाश डाला।


डॉ. नीरव कुमार ने मोटापे एवं अत्यधिक वसा को हृदय रोगों का प्रमुख जोखिम कारक बताते हुए इसकी रोकथाम पर चर्चा की। IGIC के डॉ. रवि विष्णु प्रसाद ने हार्ट अटैक के मामलों में गोल्डन ऑवर के भीतर उपचार शुरू करने के महत्व को रेखांकित किया।


पहले दिन का विशेष आकर्षण डॉ. ए. के. ठाकुर मेमोरियल ओरेशन रहा, जो बिहार में कार्डियोलॉजी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले स्वर्गीय डॉ. ए. के. ठाकुर की स्मृति में आयोजित किया जाता है। इस वर्ष यह व्याख्यान बेंगलुरु की प्रसिद्ध पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आई.बी. विजयलक्ष्मी ने दिया। उन्होंने नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों के उपचार में कैथेटर आधारित तकनीकों की उपयोगिता एवं सावधानियों पर जानकारी दी इस तरह उन्होंने बताया कि अब नवजात शिशुओं में भी हृदय की बनावट में कोई विकृतियों जैसे हार्ट में छेद या खून की नलियों का उल्टा होना को भी कैथ लैब में ठीक किया जा सकता है।


डॉ. के. हीरामथ ने हार्ट वाल्व बैंक की उपयोगिता एवं बिहार में इसकी स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं डॉ. एस. के. सिन्हा ने बीटिंग हार्ट एवं मिनिमली इनवेसिव बाईपास सर्जरी के लाभ बताए। अन्य सत्रों में डॉ अनूप सिंह ने हाई ब्लेड प्रेशर की स्थिति में आपातकालीन और संकट की घड़ी में सही उपचार की जानकारी दी, डॉ प्रशान्त चंद्र सिंहा ने पल्मोनरी एम्बोलिज्म, भागलपुर के डॉ विरेन्द्र कुमार ने पैरों में रक्त की आपूर्ति में कमी तथा डॉ आकांक्षा सिंह ने आपातकालीन स्थिति में सीने में दर्द के मरीजों के त्वरित उपचार पर चर्चा की।सम्मेलन का वैज्ञानिक कार्यक्रम रविवार, 1 नवंबर को भी जारी है तथा इसका समापन शाम 6 बजे होगा।

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