पश्चिम बंगाल में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी तृणमूल कांग्रेस ने अभिषेक बनर्जी को पार्टी से सस्पेंड कर दिया और ममता बनर्जी को पार्टी के चेयरपर्सन पद से हटा दिया. विधायक अरूप रॉय को नया चेयरमैन चुना गया. इस तरह से बागी तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने पार्टी पर कब्जा करने का संकेत दिया. अब नया संगठन बन गया है, क्या बागी इस बार सिंबल के लिए अप्लाई करेंगे? वहीं, ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि वे लोग ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं और पार्टी का सिंबल उनका है. उन्होंने सवाल किया कि अभिषेक बनर्जी कौन हैं, वही, जिन्हें जनता ने पीटा था.
एक नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम में, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने सोमवार को ममता बनर्जी द्वारा बनाई गई तृणमूल कांग्रेस पर औपचारिक रूप से कब्जा कर लिया. पार्टी बनने के बाद पहली बार ममता बनर्जी को पार्टी चेयरपर्सन के पद से हटाया दिया गया.
टीएमसी के 60 बागी विधायकों और कम से कम 70 पार्षदों की मौजूदगी में ऋतब्रत गुट ने यह फैसला किया. यह कदम पश्चिम बंगाल के राजनीतिक माहौल में एक बड़ा बदलाव है, जिसमें बागी गुट ने पार्टी के अंदर संगठन और लेजिस्लेटिव सपोर्ट का दावा किया है क्योंकि वह एक नया लीडरशिप स्ट्रक्चर बनाना चाहता है.
इससे पहले आज न्यूटाउन में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के बागी पार्षदों की बैठक हुई. इस बैठक में करीब 70 पार्षद उपस्थित थे. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के ऐलान के मुताबिक, कोलकाता में कुछ ही महीनों में कोलकाता नगर निगम के चुनाव होंगे. चुनाव दिसंबर तक होने हैं, लेकिन उससे पहले पार्षदों की ये तस्वीरें तृणमूल कांग्रेस में बड़ी फूट की ओर इशारा कर रही हैं.
राज्य में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद, शोभनदेव चटर्जी का नाम विपक्ष के नेता के तौर पर विधानसभा भेजा गया. 70 विधायकों के साइन के साथ एक रेजोल्यूशन कॉपी विधानसभा भेजी गई. फिर, एंटाली के विधायक संदीपन साहा और उलुबेरिया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने शिकायत की कि उन्होंने साइन नहीं किए. साइन नकली थे. फिर वे स्पीकर के पास गए और इसकी शिकायत की.

Post a Comment