नई दिल्ली: फिल्म अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज ने 217 करोड़ रुपये की वसूली के मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका उच्चतम न्यायालय से वापस ले ली है। जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच ने जैकलीन को उपलब्ध कानूनी विकल्पों के इस्तेमाल की इजाजत दे दी।
इसके पहले 11 जून को जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने इस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले में जैकलीन के अलावा ठग सुकेश चंद्रशेखर और उसकी पत्नी लीना पॉल के खिलाफ भी आरोप तय करने का आदेश दिया था। पटियाला हाउस कोर्ट ने इन आरोपितों के खिलाफ मकोका की धारा 3 और 4, भारतीय दंड संहिता की धारा 170, 186, 384, 386, 388, 406, 409, 420, 468, 471 और 120 बी के अलावा आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अदिति सिंह की शिकायत पर केस दर्ज किया था। उसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। इस मामले में ईडी ने कोर्ट को बताया था कि सुकेश ने स्वीकार किया था कि 57 करोड़ रुपये अदिति सिंह से लिए लेकिन जांच में पाया गया कि उसने 80 करोड़ रुपये लिये थे। ईडी ने कहा था कि सुकेश ही इस मामले का मास्टरमाइंड है। इस मामले में उसने अदिति सिंह को पहला फोन लैंडलाइन से किया था। ईडी ने कहा कि सुकेश ने बताया कि इस पैसे से गाड़ी, लग्जरी आइटम और गिफ्ट खरीदे गए।
ईडी के मुताबिक सुकेश ने जैकलीन के लिए उपहार खरीदने के लिए उस अवैध धन का इस्तेमाल किया, जो उसने शिवेंद्र सिंह की पत्नी अदिति सिंह समेत दूसरे हाई-प्रोफाइल लोगों से धोखाधड़ी कर वसूला था। ईडी के मुताबिक इस पूरे अपराध के लिए सुकेश ने ढांचा तैयार किया और अपराध को अंजाम दिया। दिल्ली पुलिस ने सुकेश चंद्रशेखर पर मकोका लगाया है।

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