कोलकाता: पश्चिम बंगाल में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को बड़ी राहत मिलने जा रही है। अब मतदाताओं को न तो वोटर स्लिप डाउनलोड कर प्रिंट निकालने की जरूरत होगी और न ही इसके लिए राजनीतिक दलों के स्थानीय नेताओं पर निर्भर रहना पड़ेगा।
चुनाव आयोग के ताजा निर्देश के अनुसार, इस बार बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) खुद मतदाताओं के घर जाकर वोटर स्लिप वितरित करेंगे। यह फैसला पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय की सिफारिश पर भारत निर्वाचन आयोग ने लिया है।
सीईओ कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन प्रक्रिया के नियमों के तहत वोटर स्लिप का वितरण बीएलओ की जिम्मेदारी है, लेकिन वर्ष 2011 के बाद से बंगाल में यह व्यवस्था लगभग खत्म हो गई थी। अब आयोग इस व्यवस्था को फिर से सख्ती से लागू करना चाहता है।
अधिकारी के अनुसार, इस कदम से न केवल मतदाताओं को सुविधा होगी, बल्कि वोटर स्लिप वितरण प्रणाली भी अधिक पारदर्शी बनेगी। यदि किसी मतदाता को वोटर स्लिप नहीं मिलती है, तो वह संबंधित बीएलओ से सीधे संपर्क कर स्लिप प्राप्त कर सकेगा।
इस बीच, निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को एक बार फिर पत्र भेजकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में लगे बीएलओ, बीएलओ पर्यवेक्षक, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) का लंबित मानदेय तुरंत जारी करने को कहा है।
यह इस मामले में आयोग की तीसरी चिट्ठी है। इससे पहले अगस्त और फिर दिसंबर में भी राज्य सरकार को इस संबंध में स्मरण पत्र भेजे जा चुके हैं।

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