कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वायरल पोस्ट साझा करते हुए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तीखी आलोचना की है।
शुभेंदु अधिकारी ने लिखा कि वायरल पोस्ट में युवक द्वारा व्यक्त की गई बात पूरी तरह सही है। उन्होंने दावा किया कि अकेले यह व्यक्ति नहीं, बल्कि लगभग 17 लाख युवक-युवतियां पहले भी इसी तरह फॉर्म भरकर ठगे गए थे। उनका आरोप है कि राज्य सरकार बार-बार युवाओं को सरकारी योजनाओं के नाम पर लाइन में खड़ा कर परेशान कर रही है, जबकि आज के समय में ऐसे काम घर बैठे ऑनलाइन आसानी से किए जा सकते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोगों को कैंपों में बुलाकर समय और पैसे की बर्बादी कराना ममता सरकार की आदत बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वार्थ के तहत लोगों को जानबूझकर परेशान करना अब सरकार की कार्यप्रणाली बन गया है। बीते दो महीनों में बीएलओ के माध्यम से जानबूझकर त्रुटियां कराकर लोगों को एसआईआर की सुनवाई में खड़ा किया गया और अब बेरोज़गार युवाओं की बारी है।
शुभेंदु अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि बेरोज़गारी भत्ते के लिए आवेदन करने गए युवाओं को पुलिस की लाठियां झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा और मालदह के चांचल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बेरोज़गार भत्ते के लिए आवेदन करने पर पुलिस बल प्रयोग किया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार कभी “युवश्री” तो कभी “युवसाथी” जैसे नाम बदलकर योजनाएं पेश करती है, लेकिन राज्य में उद्योग-धंधों और रोजगार के अवसरों के अभाव में युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। उनका आरोप है कि प्रतिभा का कोई मूल्य नहीं रह गया है।
अंत में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं का सम्मान करती, तो उन्हें जबरन लाइन में खड़ा कर “बेरोज़गार” का ठप्पा लगाने के बजाय घर बैठे सम्मानपूर्वक फॉर्म भरने की सुविधा देती। ऐसा करने पर न तो पुलिस तैनात करनी पड़ती और न ही युवाओं पर लाठीचार्ज जैसी घटनाएं सामने आतीं।

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