Air Force Day : पहली बार महिला अधिकारी के हाथ परेड की कमान, पीएम मोदी ने दी बधाई


वायुसेना दिवस: पहली बार कोई महिला अधिकारी एयरफोर्स परेड (Air force parade) को कमांड करने जा रही हैं. ग्रुप कैप्टन शैलजा धामी (Shailja Dhami) आज प्रयागराज में भारतीय वायुसेना की परेड को कमांड करेंगी.  प्रयागराज के बमरौली में वायुसेना की सेवा के 91वीं वर्षगांठ के मौके पर शैलजा धामी परेड को कमांड करेंगी.

हेलीकॉप्टर पायलट शैलजा धामी पहली महिला अधिकारी बनी थीं जिन्हें मार्च माह में वायुसेना की कॉम्बैट यूनिट की कमान सौंपी गई थी. शैलजा वेस्टर्न सेक्टर में मिसाइल सक्वॉड्रन की मुखिया हैं. उन्हें वायुसेना में 2003 में कमिशन्ड किया गया था. वह क्वालिफाईड इंस्ट्रक्टर हैं और 2800 घंटे की उड़ान का अनुभव है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयर फोर्स डे पर सभी वायुसेना के अधिकारियों और उनके परिवारों को बधाई दी है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत को भारतीय वायुसेना की वीरता, प्रतिबद्धता, समर्पण पर गर्व है. उनका बलिदान और सेवा यह सुनिश्चित करती है कि हमारा आसमान सुरक्षित रहे.

भारतीय सुरक्षाबलों में महिलाएं लगातार आगे आ रही हैं, ऐसे में जिस तरह से शैलजा धामी को यह मौका मिला है वह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. अहम बात यह है कि पहली बार परेड में सभी महिलाए अधिकारियों को देखने को मिलेगा, जिन्हें हाल ही में अग्निवीर वायु के जरिए भर्ती किया गया है. ये सभी एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर पुरुष सहयोगियों के साथ मार्च करेंगी. परेड में पहली बार गरुड़ कमांडों भी हिस्सा लेने जा रहे हैं.

अब वायुसेना में महिला अधिकारियों को सिर्फ नाम के लिए नहीं भर्ती किया जा रहा है, अब मुख्य धारा से जुड़ रही हैं, उनेहें पुरुषों की तरह अहम जिम्मेदारियां दी जा रही हैं. वो लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, बोर्ड वॉरशिप में अपनी सेवा दे रही हैं, पीबीओआर में शामिल हो रही हैं. स्थाई कमिशन पर तैनात किया जा रहा है, साथ ही वो एनडीए में ट्रेनिंग ले रही हैं.

भारतीय वायुसेना और नौसेना ने महिला अधिकारियों को स्पेशल फोर्सेस यूनिट में शामिल होने की अनुमति दे दी है. गरुड़ कमांडो फोर्स, मरीन कमांडो अब लैंगिक समानता को आगे बढ़ा रहे हैं और महिलाओं को बराबर का अवसर मिल रहा है. 

भारतीय वायुसेना के चीफ मार्शल वीआर चौधरी प्रयागराज में वायुसेना का नया ध्वज का अनावरण करेंगे. वायुसेना की शिखा को अब झंडे के ऊपर दाएं कोने में लगाया जाएगा. वर्तमान ध्वज को सात दशक से भी अधिक समय पहले अपनाया गया था.

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