खरमास के समापन के साथ ही शादी-विवाह शुरू



मकर संक्रांति के बाद शुरू हुई शादियों के शुभ-मुहूर्त एक बार फिर शुरू होते ही एक बार फिर जिले में चारों ओर शहनाई गूंजने लगी हैं। आगामी पांच माह में शादियों के 70 से ज्यादा मुहूर्त हैं, जिसमें शादियां होना अच्छा माना जाता है। शादियों के चलते बाजार में चहल-पहल बढ़ गई है और कई शादी घरों में एक माह पहले से ही बुकिंग हो चुकी हैं।

 हालांकि गृह प्रवेश के मुहूर्त भी इस बार सीमित रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों की माने तो शादियां हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। इसलिए कई परिवार अपने बच्चों की शादियों के लिए कुंडली लेकर ज्योतिषाचार्यों के पास पहुंच रहे हैं। रिश्ता जन्म-जन्मांतर के लिए जुड़ जाता है। हालही में हुए अग्रवाल समाज के परिचय सम्मेलन के दौरान भी कई जोड़ों के विवाह तय हुए हैं। पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार इस बार सबसे अधिक शादी के मुहूर्त मई माह में पड़ रहे हैं।

इस साल अप्रैल व अक्षय तृतीया पर कोई मुहूर्त नहीं पड़ रहा है। 14 जनवरी को खरमास के समापन के साथ ही शादी-विवाह शुरू हो गए हैं और यह सिलसिला मार्च माह तक जारी रहेगा। गृह प्रवेश के लिए जनवरी माह में केवल 18 व 27 तारीख के दो ही सबसे अच्छे शुभ मुहूर्त हैं। देव गुरु बृहस्पति 31 मार्च को अस्त होंगे और 27 अप्रैल को उदित होंगे। इस बीच कोई मुहूर्त नहीं है। 29 जून को देवशयनी एकादशी के बाद विवाह मुहूर्त नहीं हैं और चातुमार्स शुरू हो जाएगा, जबकि 18 जुलाई से अधिकमास भी लगेगा।

जनवरी और मार्च में 11-11 मुहूर्त, अप्रैल में नहीं होंगी शादियां

जनवरी :- 19, 22, 25, 26, 27, 30 व 31

फरवरी :- 1, 6 से 17 तक प्रतिदिन , 23, 24, 27 एवं 28 हैं।

मार्च:- 1, 5 से 14 मार्च तक प्रतिदिन

मई:- 2 से 11 तक प्रतिदिन, 15, 16, 20, 21, 22, 26 से 31 तक प्रतिदिन।

जून:- 1, 3 से 7, 11, 12, 13, 22, 23, 25 से 29 जून।

पंडित शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार इस बार गृह प्रवेश के जुलाई तक 10 श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त हैं। जनवरी में अब 27, फरवरी में 10, 17, मार्च में 4 तारीख, मई में 3, 15, 29, 31 एवं जून में 3 तारीख शुभ रहेंगी। उपलब्ध मुहूर्त के अलावा विशेष परिस्थितियों में अक्षय तृतीया, विजयादशमी, चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान भी गृह प्रवेश किया जा सकता है। गृह प्रवेश के समय नौ ग्रह शांति, वस्तु पूजन, कुलदेवी और कुलदेवता का पूजन कराना चाहिए। गृह प्रवेश के लिए इस बार कम ही शुभ मुहूर्त होता है। ऐसा राशियों की स्थिति और उनके परिवर्तन के कारण हुआ है।