इस माह के अंत तक सामान्य हो जाएगी कोयले की आपूर्ति, कोल इंडिया के सीएमडी ने कहा

पिछले एक माह से देश में कोयले का संकट चल रहा है और कई राज्य बिजली के बड़े संकट के मुहाने पर दिख रहे हैं। कई प्लांट के पास कोयले का कोई स्टॉक नहीं है और वे रोजाना की आपूर्ति पर बिजली उत्पादन के लिए निर्भर हैं। देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी की स्थिति भी ठीक नहीं है। संकट को दूर करने के लिए अब सबकी निगाहें कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) पर टिकी हैं, जो देश के कोयला उत्पादन में 80 फीसद से अधिक की हिस्सेदारी रखती है। कोल इंडिया भी उत्पादन और आपूर्ति को सामान्य करने में जुटी है। इन मुद्दों पर कोल इंडिया के सीएमडी प्रमोद अग्रवाल से दैनिक जागरण के विशेष संवाददाता राजीव कुमार की बातचीत के अंश :

प्रश्न: कोयला आपूर्ति की स्थिति कब तक सामान्य हो जाएगी?

अग्रवालः कोयले की आपूर्ति बढ़ने के साथ ही हम उम्मीद करते हैं कि यह संकट खत्म हो जाएगा और हमें आशा हैं कि इस माह के अंत तक सब कुछ सामान्य हो जाएगा। अक्टूबर में पिछले चार दिनों से हम बिजली क्षेत्र को प्रतिदिन 14.5 लाख टन कोयले की आपूर्ति कर रहे हैं और हम इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी करके इस आपूर्ति को 16.5 लाख टन तक ले जाएंगे। कोयले के रोजाना उठाव में भी इजाफा हुआ है और अब यह 17.5 लाख टन के स्तर तक पहुंच गया है।

प्रश्न: आखिर कोयले का संकट इस स्तर तक गहराया ही क्यों, जबकि देश में कोयले का पर्याप्त सुरक्षित भंडार है?

अग्रवालः इसे हम कोयले का संकट नहीं कह सकते हैं। यह वह स्थिति है जहां कोयले की आपूर्ति के मुकाबले मांग अचानक से बढ़ गई। अगर देखा जाए तो चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी इस वर्ष अप्रैल-सितंबर अवधि में हमने 24.6 करोड़ टन कोयले की आपूर्ति बिजली क्षेत्र को की है, जो इस अवधि में बिजली क्षेत्र को होने वाली अब तक की सबसे अधिक आपूर्ति है। इसके बावजूद कोयले की काफी अधिक मांग निकल रही है।

प्रश्न: फिर बिजली प्लांट के पास कोयले का स्टॉक खत्म क्यों हो गया, आप किसे जिम्मेदार मानते हैं?

अग्रवालः जहां तक बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक कम होने का सवाल है तो उसके और भी कई कारण हैं। सबसे पहला कारण है कि यह अनुमान नहीं लगाया जा सका था कि बिजली कि मांग अचानक इतनी अधिक बढ़ जाएगी। आर्थिक गतिविधियों में तेजी के कारण अगस्त के दूसरे सप्ताह से कोयले की जबरदस्त मांग होने लगी। दूसरी वजह यह रही कि आयातित कोयले की कीमत में भारी बढ़ोतरी हो गई। इस कारण देश में आयातित कोयले से चलने वाले बिजली प्लांट ने उत्पादन घटा दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि घरेलू कोयले पर आधारित बिजली प्लांट पर उत्पादन का बोझ बढ़ गया और वे अधिक कोयले की मांग करने लगे। अमूमन बिजली प्लांट हर साल अप्रैल-जून के दौरान कोयले का अतिरिक्त भंडारण करते हैं। लेकिन इस वर्ष कोरोना की वजह से यह संभव नहीं हो सका। वहीं, सितंबर के दौरान मानसून की बारिश के कारण पूर्वी और मध्य भारत में खनन प्रभावित रहा। अगर इनमें से कोई एक भी वजह नहीं होती तो बिजली प्लांट में कोयले की स्टॉक स्थिति निश्चित रूप से बेहतर होती।

प्रश्न: अब क्या आपको लगता है कि अक्टूबर में मांग के मुताबिक कोयले का उत्पादन होने लगेगा?

अग्रवाल: हर वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल-सितंबर के मुकाबले दूसरी छमाही यानी अक्टूबर से अगले वर्ष मार्च तक की अवधि में कोयले का अधिक उत्पादन होता है। पिछले चार दिनों से कोयले के उत्पादन में बढ़ोतरी हो रही है और प्रतिदिन का उत्पादन स्तर 11.54 लाख टन पर पहुंच गया है। इसमें अभी और बढ़ोतरी होगी। इस बार कोयले की असामान्य मांग है जो अभी जारी रह सकती है इसलिए हम अधिक उत्पादन के जरिए इसकी आपूर्ति की तैयारी में है।

प्रश्न: चालू वित्त वर्ष में कोयला उत्पादन का क्या अनुमान है?

अग्रवाल: चालू वित्त वर्ष के लिए 67 करोड़ टन का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि हमारा अनुमान है कि हम 65 करोड़ टन तक का उत्पादन करेंगे।