बिहार के भूमि सुधार विभाग का फैसला, अब महीने के हिसाब से होगी राजस्व की वसूली

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन के लगान एवं अन्य करों की वसूली के लिए वार्षिक के बदले मासिक लक्ष्य तय कर दिया है। अब अप्रैल से सितंबर के बीच हर महीने पांच फीसद वसूली होगी। यानी इन छह महीनों में कुल 30 फीसद वसूली का लक्ष्य रखा गया है। अक्टूबर से जनवरी तक के चार महीने में वसूली का लक्ष्य हर महीने 10 फीसद के हिसाब से 40 प्रतिशत तय किया गया है। वित्तीय वर्ष के अंतिम दो महीने-फरवरी एवं मार्च के लिए कर्मियों को 30 फीसद राजस्व वसूली का जिम्मा दिया गया है। राजस्व की वसूली जमीन के लगान के अलावा सैरात और सेस के मद में होती है। 

विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने शनिवार को बताया कि शत प्रतिशत राजस्व वसूली के लिए नई व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के लिए पांच सौ करोड़ रुपये की राजस्व वसूली का लक्ष्य रखा गया है। अगस्त तक 60 फीसद वसूली हो चुकी है। यह पिछले साल की इस अवधि की तुलना में 36.42 फीसद अधिक है। कोविड के चलते पिछले वित्तीय वर्ष में राजस्व वसूली पर खराब असर पड़ा था। बमुश्किल 50 फीसद वसूली हो पाई थी। 

पटना का लक्ष्य सबसे अधिक

सबसे अधिक 33.50 करोड़ रुपये की वसूली पटना जिला को करना है। अरवल के लिए सबसे कम तीन करोड़ की वसूली का लक्ष्य है। कोरोना के कारण पिछले वित्तीय वर्ष में सैरातों से भी वसूली भी नहीं हो पाई। विभाग ने प्रमंडलीय आयुक्तों एवं जिलाधिकारियों को कहा है कि वे नए सिरे से सैरातों की बंदोबस्ती करें। इन अधिकारियों को कहा गया है कि वे सैरातों की विभागीय वसूली को बढ़ावा न दें।   

नुकसान से राहत

राजस्व विभाग ने सैरात के उन बंदोबस्तधारियों को भी राहत देने का फैसला किया है, जिन्हें कोविड संक्रमण के दौरान कारोबार बंद रहने से नुकसान हुआ था। यह प्रक्रिया पहले से चल रही है। प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी, अनुमंडलाधिकारी एवं अंचलाधिकारी को राशि के हिसाब से सैरात की बंदोबस्त की रकम में माफी देने का अधिकार है। सैरात के तहत बस स्टैंड, हाट-बाजार, मेला आदि आते हैं।