कोलकाता में तीसरे दिन भी बसों की कमी से परेशान हुए लोग, शाम के समय अधिक हो रही है परेशानी

कोरोना का संक्रमण कुछ कम होने के बाद राज्य सरकार ने गत एक जुलाई से बसें चलाने की घोषणा की। ऐसे में सरकारी बसें तो सड़कों पर उतर रही हैं, लेकिन निजी बसें अब भी ना के बराबर ही चल रही हैं। निजी बस संगठनों ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि जब तक किराया बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार कोई चर्चा नहीं करती, तब तक सड़कों पर बसें उतारना संभव नहीं है। राज्य सरकार और बस संगठनों की तनातनी के बीच भुगतना पड़ रहा है तो आम लोगों को। घर से ऑफिस आना हो या फिर ऑफिस से घर जाना हो, बसों की कमी के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शटल और टैक्सियां दोगुना किराया वसूल रही हैं।

आज परिवहन मंत्री करेंगे बैठक

सोमवार को राज्य के परिवहन मंत्री फिरहाद हकीम निजी बस संगठनों के साथ बैठक करेंगे। इस बारे में उन्होंने कहा कि फिलहाल किराया बढ़ाने को लेकर कुछ नहीं कहा जाएगा, लेकिन केंद्र सरकार से पेट्रोल व डीजल के दाम कम करने की अपील की जाएगी ताकि बस मालिक बसें चला सकें।

अड़े हैं बस संगठन, किराया बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं

ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट के महासचिव तपन बनर्जी ने कहा कि किराया बढ़ाने के अलावा काेई और विकल्प नहीं बचा है। 93 रुपये पर डीजल है और इसके बीच लोकल ट्रेनें व मेट्रो भी बंद हैं। इस पर से कहा गया है कि कोविड नियमों को मानते हुए 50 फीसद या​​त्रियों को उठाना होगा। ऐसे में किराया बढ़ाये बगैर बसें उतारना संभव ही नहीं है। सूत्रों के अनुसार, राज्य में लगभग 85 फीसद यात्री निजी बस से और बाकी 15 फीसद यात्री सरकारी बसों से यात्रा करते हैं।

घंटों कतार में खड़े रहने के बाद मिल रही हैं बसें

सुबह के समय तो कुछ राहत है, लेकिन शाम को कतार में घंटों इंतजार के बाद ही लोगों को बसें मिल रही हैं। सरकारी बसों की संख्या भी इतनी कम है कि उसमें कहीं से 50 फीसद या​​त्रियों को चढ़ाना संभव नहीं है, ऐसे में खचाखच भरी बसों में ही यात्री चढ़ रहे हैं क्योंकि किसी तरह उन्हें घर पहुंचना है। आमता जाने के लिए लगभग एक घंटे से अधिक धर्मतल्ला बस स्टैण्ड पर कतार में खड़े व्यक्ति ने कहा, 200 लोग आमता जाने के लिए कतार में हैं और 50 फीसद या​त्रियों को उठाने की बात कही जा रही है। बसें इतनी कम संख्या में चल रही हैं, ऐसे में 50 फीसद सीटिंग कैसे संभव है। इसी तरह कतार में कोई एक तो कोई डेढ़ घंटे खड़ा दिखा।

एक बस दिखते ही उमड़ पड़ रहे हैं लोग

बसों की संख्या में कमी के कारण आलम कुछ ऐसा है कि एक बस दिखते ही लोग उमड़ पड़ रहे हैं। ऐसे में कोरोना नियम तो दूर की बात लोग धर्मतल्ला से आमता तक बस में खड़े होकर भी जा रहे हैं। खचाखच भरी बस में ही लोगों को सफर करना पड़ रहा है। गत एक जुलाई से बसें चालू करने की घोषणा की गयी थीं, लेकिन शनिवार को तीसरे दिन भी लोगों की परेशानियां जस की तस बनी रहीं। बसों की कमी का सामना करते हुए लोग किसी तरह घर जा रहे हैं। अब सोमवार का दिन भी काफी कठिन होने वाला है क्यों​कि सप्ताह के पहले दिन ये देखने वाली बात होगी कि सरकारी बसें किस तरह आम लोगों की परेशानियां हल कर पायेंगी।