बंगाल विधानसभा में आज विधान परिषद बनाने का प्रस्ताव पेश करेगी ममता बनर्जी सरकार


बंगाल में प्रचंड बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता में आई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज विधानसभा में राज्य विधान परिषद बनाने का प्रस्ताव पेश करेंगी। पांच मई को तीसरी बार बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बमुश्किल 12 दिन बाद ही ममता ने विधान परिषद यानी राज्य विधानसभा के उच्च सदन बनाने के फैसले को कैबिनेट से भी मंजूरी दी थी, जिसका उन्होंने चुनाव के दौरान वादा किया था। ममता ने चुनाव से ठीक पहले घोषणा की थी कि जिन प्रतिष्ठित लोगों और वरिष्ठ नेताओं को विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं दिया गया है, उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया जाएगा। सीएम ने विधानसभा चुनाव के बाद नंदीग्राम और सिंगूर में उनके अभियान का हिस्सा रहने वालों को सीट देने की कसम खाई है।

यह देखते हुए कि मौजूदा वित्त मंत्री अमित मित्रा, पूर्व मंत्री पूर्णेंदु बोस जैसे पार्टी के कई दिग्गजों को विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया गया था, अब विधान परिषद के जरिए उन्हें समायोजित करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि हालिया चुनाव में ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम सीट पर अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी से हार गई थीं। इधर, राजनीतिक जानकारों की मानें तो विधान परिषद का गठन इतना आसान भी नहीं है। दरअसल असल चुनौती इसे बंगाल विधानसभा से पारित कराने के बाद भारत की संसद के दोनों सदनों में इसे पारित और स्वीकृत कराने की है। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी भी जरूरी है। इधर, विधानसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने वाले वामदलों ने ममता के इस कदम का विरोध किया है।

छह राज्यों में है विधान परिषद

बता दें कि इस समय देश के केवल छह राज्यों में विधान परिषद है, जिनमें बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक शामिल है। बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। चूंकि एक विधान परिषद में सदस्यों की संख्या विधानसभा के सदस्यों से एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, इसलिए बंगाल में विधान परिषद में 98 सदस्य हो सकते हैं। सदस्यों में से 1/3 सदस्य विधायकों द्वारा चुने जाएंगे, जबकि अन्य 1/3 सदस्य नगर निकायों, जिला परिषद और अन्य स्थानीय निकायों द्वारा चुने जाएंगे। सरकार द्वारा विधान परिषद में सदस्यों को मनोनीत करने का भी प्रावधान होगा। राज्य सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल कुछ सदस्यों को मनोनीत कर सकते है। राज्यसभा की तरह ही इसमें भी एक सभापति और एक उपाध्यक्ष होते हैं। विधान परिषद के सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है।