विदेश से मदद मिलने का सिलसिला जारी, 24 घंटे के भीतर अमेरिका, फ्रांस और ताइवान से आई मदद

विदेशी सरकारों से भारत को मदद मिलने का सिलसिला रविवार को और तेज हो गया। शनिवार रात से लेकर रविवार शाम तक अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और ताइवान से मदद की बड़ी खेप भारत पहुंच चुकी है। अगले 24 घंटे में ब्रिटेन, यूरोपीय संघ समेत कुछ दूसरे देशों से चिकित्सा सामग्री व उपकरण लेकर और कुछ विमान भारत पहुंचेंगे। विदेश से बड़े पैमाने पर आक्सीजन जेनेरेटर्स मशीन और कृत्रिम सांस देने वाली मशीनें पहुंचने लगी हैं।

यह है बड़ी चुनौती 

अब सरकार के समक्ष इन साजोसामान को लक्षित स्थल पर जल्दी पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। इस बारे में गठित की गई उच्चस्तरीय समिति लगातार राज्यों के साथ संपर्क में है, ताकि एक राष्ट्रीय स्तर का डाटा बेस बन सके। आने वाले दिनों में इस डाटा बेस के आधार पर ही विदेश से हासिल मदद को वितरित किया जाएगा।

विदेश से मदद लेने की कोशिश जारी

विदेश मंत्रालय के स्तर पर विदेश से मदद लेने की कोशिश भी जारी है। सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर समूह-सात देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने जा रहे हैं। इसमें भारतीय विदेश मंत्री को खास तौर पर बुलाया गया है। इस दौरान उनकी कई बड़े देशों के विदेश मंत्रियो से बात होगी, जिसमें कोरोना से लड़ाई में मदद को लेकर व्यापक तौर पर चर्चा हो सकती है। भारत को मदद देने में समूह-सात देश सबसे आगे हैं।

अमेरिका से आ रही लगातार मदद 

रविवार को सुबह सबसे पहला जहाज अमेरिका से आया है, जिसमें 1000 आक्सजीन सिलेंडर, इसमें लगाए जाने वाले रेगुलेटर और दूसरे मेडिकल इक्विपमेंट आए हैं। पिछले दो दिनों के भीतर अमेरिका से मदद के तीन जहाज भारत पहुंच चुके हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इससे देश की मेडिकल उत्पादन क्षमता में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है।

अस्पतालों में लगाने की प्रक्रिया शुरू

फ्रांस से आए आठ आक्सीजन जेनेरेटर्स को दिल्ली के छह अस्पतालों में लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ये जेनेरेटर्स अकेले ही 250 बिस्तरों को कई महीनों तक निर्बाध आक्सीजन दे सकते हैं। भारत की कोशिश इस तरह के और विशाल जेनेरेटर्स लाने की है।

ताइवान से भी आई मदद 

रविवार को दिन में ताइवान का एक जहाज 150 आक्सीजन कंसंट्रेटर्स और 500 आक्सीजन सिलेंडर लेकर आया। नई दिल्ली स्थित ताइवान के संस्कृति केंद्र की तरफ से बताया गया है कि उनका देश अगले कुछ दिनों में दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों से भरा एक और विमान भेजेगा।

चीन भी कर रहा काम 

चीन के राजदूत की तरफ से रविवार को बताया गया है कि चीन की कंपनियों ने भारत को आपूर्ति के लिए श्रमिक दिवस (एक मई) को भी काम किया है, जो अप्रत्याशित है। एक मई के दिन चीन की किसी भी फैक्ट्री में काम नहीं होता लेकिन भारत की जरूरत को देखते हुए वहां के श्रमिकों व कर्मचारियों ने उस दिन भी काम किया है। चीन ने हाल ही में कहा है कि भारत को वह 40 हजार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स भेजने जा रहा है। हालांकि यह सरकार की तरफ से मदद नहीं है बल्कि भारत से निजी तौर पर की गई खरीद है।