आसन्न विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका में होंगे पूर्वांचलीः नीरज कुमार सिंह


व्यक्ति के जीवन में समस्याओं का अंबार ही रहता है. समस्या सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक व सामारिक हो सकती है. समस्याओं के समाधान के ही लिए शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की व्यवस्था हमारे संविधान में की गयी है. इसे हम और अच्छे तरीके से समझने की कोशिश करते हैं और वह यह है कि भारतीय संविधान में व्यवस्थापिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका व प्रेस की व्यवस्था की गयी है. इन सभी के बावजूद आज हमारे बीच कहीं न कहीं संवादहीनता की बात सामने आती है. अधिकारों का अतिक्रमण ही विवाद की मुख्य वजह है. संविधान में सबकुछ स्पष्ट होने के बावजूद अधिकारोें के लिए संघर्ष हो रहा है. उत्तर प्रदेश व बिहार के करोड़ों लोग आजीविका के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर गये हैं. देखा जाए तो उनके सामने अनेकों प्रकार की समस्याएं हैं, उक्त बातें वर्ष 2016 में पूर्वांचल एकता मंच का गठन करने वाले कोलकाता उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता, लोक प्रशासन में मास्टर डिग्री हासिल करने वाले पूर्वांचल एकता मंच( पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष नीरज कुमार सिंह ने एक साक्षात्कार के दौरान कही. गौरतलब हो कि श्री सिंह अनेक  सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं. समय-समय पर  रक्तदान शिविर, वस्त्र, पाठय पुस्तक वितरण शिविर आयोजित करते रहते हैं. इसके साथ ही वे पूर्वांचल के लोगों को जागरूक करने के लिए सदैव ही कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं. उन्होंने दैनिक युवा शक्ति के समाचार संपादक प्रमोद दूबे से बातचीत की. प्रस्तुत है उसके संपादिक अंशः-

सवालः पूर्वांचल एकता मंच जैसे संगठन की जरूरत क्यों महसूस हुई? इसका गठन कब किया गया?

जवाबः उत्तर प्रदेश व बिहार के करोड़ों लोग आजीविका के लिए दूसरे राज्यों में रहते हैं. चूंकि व्यक्ति एक सामाजिक प्राणी है, इसलिए  उसके सामने कई समस्याएं हैं. दिल्ली सहित कुछ राज्यों में पूर्वांचल के लोगों के साथ जिस प्रकार का अत्याचार किया गया है. उन्हें प्रताड़ित किया गया. इसी प्रताड़ना को आधार बनाकर पूर्वांचल एकता मंच की स्थापना की गयी. पश्चिम बंगाल में इसे वर्ष 2016 में नेक उद्देश्यों के साथ स्थापित किया गया. पश्चिम बंगाल में पूर्वांचल के लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए इस संगठन की स्थापना करना हमारा एकमात्र उद्देश्य है.

सवालः संगठन के उद्दश्यों को और स्पष्ट करें?

जवाबः हम यहां आपसे पश्चिम बंगाल की ही बात करते हैं. हमारा कार्यक्षेत्र पश्चिम बंगाल ही है. यहां हम देखते हैं कि लाखों लोग नागरिक समस्याओं से त्रस्त हैं. उन्हें शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के स्तर पर प्रताड़ित किया जाता है. उनकी सुनने वाला कोई नहीं है, न कोई साथ देने वाला है और साथ खड़ा होने वाला है. ऐसे लोगों को मुफ्त कानूनी सुविधाओं को उपलब्ध कराना हमारे संस्था का प्रमुख उद्देश्य है. आपको विश्वास करना होगा. आजतक हमारी संस्था  ने हजारों लोगों को कानूनी सुविधा बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध करायी है.

सवालः किस तरह की समस्याओं के समाधान के लिए आपका संगठन कार्य करता है?

जवाबः देखिए मैंने पहले ही आपसे कह दिया है कि समस्याएं कई तरह की होती है. शासन-प्रशासन से सम्बंधित समस्याओं पर हम विशेष ध्यान देते हैं. उदाहरण के रूप में आप समझ सकते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को स्थानीय स्तर पर परेशान किया जाता है. उसके साथ अन्याय होता है. पुलिस उसकी शिकायतों पर ध्यान नहीं देती है. प्रशासनिक अधिकारी उसपर काई ध्यान नहीं देते हैं. ऐसे में वह व्यक्ति क्या कर सकता है? वह असहाय होता है, सहायता के लिए वह दूसरों की तरफ टकटकी लगाये रहता है. हम ऐसे लोगों की सहायता के लिए आगे आते हैं, और उनकी सहायता करते हैं. उत्तर प्रदेश एवं बिहार के लोगों को पश्चिम बंगाल में तरह-तरह से परेशान किया जाता है. हमारी कोशिश होती है कि पीड़ितों तक सहायता पहुंचाई जाए. इसके लिए हमारा मंच पूरी कोशिश करता है. समस्या सामाजिक भी हो सकती है, आर्थिक  व शैक्षणिक भी हो सकती है, हमारी कोशिश उन सभी के समाधान की होती है.

सवालः पूर्वांचल एकता मंच के सामने सबसे बड़ी समस्या क्या है?

जवाबः हमारे संगठन के सामने सबसे बड़ी समस्या लोगों को एकजुट करने की है. हमारी आबादी पश्चिम बंगाल में 35-40 फीसदी है. यहां जिनकी आबादी पांच फीसदी है, उसके लिए राज्य सरकार काम करती है, पर हमारे अपने लोगों के लिए कोई योजना नहीं है. विचार कीजिए ऐसा क्योें होता है? ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि हमारे अंदर एकता नहीं है. जाति—पाति, धर्म व क्षेत्र के आधार पर लोग विभाजित हैं. संतरे की तरह हमारी एकता है जो बाहर से एक पतले कबर से ढकी है. ज्योंहि हम उपरी कवर हटाते हैं, हमारी एकता छिन्न-भिन्न दिखती है. हम एक नहीं है इसलिए तमाम प्रकार के अन्याय सहते हैं. हमारे उपर शासन-प्रशासन के स्तर पर अन्याय हो रहा है. हमेंं एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाना होगा तभी हमारे अधिकारों की रक्षा हो सकेगी.

सवालः आप पश्चिम बंगाल के राजनीतिक दलों से क्या अपेक्षा रखते हैं?

जवाबः पूर्वांचल एकता मंच पश्चिम बंगाल के तमाम राजनीतिक दलों से अपेक्षा रखता है कि वे पूर्वांचल के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व प्रदान करें. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अधिकाधिक संख्या में, विशेषकर एक उचित संख्या में पूर्वांचल के लोगों को विधानसभा चुनाव में टिकट दिया जाए. जबतक हमारे अपने लोगों को टिकट नहीं दिया जाता है, हमारा सर्वांगीण विकास नहीं होे सकता है. विधानसभा के अंदर उत्तर प्रदेश व बिहार के लोगों की आवाज को बुलंद करने के लिए आवश्यक संख्या में विधायकों का होना आवश्यक है. विधायक होंगे तो वे पूर्वांचल के वंचित लोगों की आवाज विधानसभा में सुनाई देगी. सरकार उनपर ध्यान देगी. हमारी मांग है कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, वाममोर्चा उचित संख्या में पूवार्र्चल के लोगों को विधानसभा चुनाव में टिकट प्रदान करें.

सवालः एक पच्चास वर्ष का व्यक्ति पश्चिम बंगाल में आजीविका के लिए आता है. स्थायी आवास के अभाव में उसका मतदाता पहचान पत्र, आधारकार्ड नहीं बनाया जाता है. तमाम प्रकार का तर्क दिया जाता है. इसपर आपके विचार?

जवाबः पश्चिम बंगाल में यदि किसी के पास स्थायी आवास नहीं है तो इस आधार पर उसे मतदाता पहचान पत्र, आधारकार्ड से वंचित करना कानूनी अपराध ही नहीं उस व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों का घोर उलंघन है. ऐसे लोगों को वोट करने का ही अधिकार नहीं होगा, यही नहीं उनका बैंकों में खाता नहीं खुलेगा,यदि पश्चिम बंगाल में ऐसा है तो यह गलत है, इसके समाधान के लिए पूर्वांचल एकता मंच आने वाले दिनों में एक बड़ा आन्दोलन करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए हम तमाम राजनीतिक दलों से निवेदन करते हैं कि अधिकाधिक संख्या में पूर्वांचल के लोगों को विधानसभा चुनाव में टिकट दिया जाए.