इस वर्ष भारत की GDP में आएगी 9.6% की गिरावट, अगले साल मिलेगी रफ्तार: World Bank


वर्ल्ड बैंक ने यह अनुमान लगाया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 में 9.6 फीसदी की गिरावट आएगी. अर्थव्यवस्था मे आयी गिरावट घरेलू खर्चों और निजी निवेश में बढ़ती कमी को दर्शाता है.

विश्व बैंक के ग्लोबल इकोनॉमिक रिपोर्ट में यह अनुमान जाहिर किया गया है. विश्व बैंक (World Bank) ने  कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2020-21 में 9.6 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है. 

अगले साल होगी अच्छी बढ़त 

हालांकि, अच्छी खबर यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2021-22 में बाउंस बैक करेगी. विश्व बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों की आय बुरी तरीके से प्रभावित हुई है, जिसमें कि करीब 80 फीसदी लोगों को रोजगार मिला हुआ है.  

अनुमान के मुताबिक सर्विसेज (सेवाओं) और मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) में तेज गति से रिकवरी देखने को मिलेगी. वहीं, दूसरी तरफ पाकिस्तान कि बात करें तो वर्ल्ड बैंक का कहना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुस्त रहेगी और वित्त वर्ष 2020-21 में 0.5 फीसदी के आसपास बढ़ेगी. 

रिपोर्ट के अनुसार साउथ-एशिया में कोरोना महामारी का प्रभाव कम देखने को मिला है, लेकिन जिन देशों में पर्यटन कमाई या रोजगार का मुख्य साधन है जैसे मालदीव्स,नेपाल, श्रीलंका आदि वहां की अर्थव्यवस्था को कोरोनो के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. 

साउथ-एशिया रीजन की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर में

कोरोना ने पूरे साउथ-एशिया रीजन की अर्थव्यवस्था को ही मंदी के दौर में डाल दिया है. यहां तक कि बांग्लादेश जो कि कोरोना महामारी से पहले एक तेजी से बढ़ने वाला बाजार था, वहां की अर्थव्यवस्था में भी साल 2019-20 में साल 2019-20 में 2 फीसदी की गिरावट आयी है.

रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया में वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है. विश्व बैंक ने 2021 में वैश्विक अर्थव्यवस्था में चार फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया है. 

वर्ल्ड बैंक ने यह अनुमान लगाया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 में 9.6 फीसदी की गिरावट आएगी. अर्थव्यवस्था मे आयी गिरावट घरेलू खर्चों और निजी निवेश में बढ़ती कमी को दर्शाता है.

विश्व बैंक के ग्लोबल इकोनॉमिक रिपोर्ट में यह अनुमान जाहिर किया गया है. विश्व बैंक (World Bank) ने  कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2020-21 में 9.6 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है. 

अगले साल होगी अच्छी बढ़त 

हालांकि, अच्छी खबर यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2021-22 में बाउंस बैक करेगी. विश्व बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों की आय बुरी तरीके से प्रभावित हुई है, जिसमें कि करीब 80 फीसदी लोगों को रोजगार मिला हुआ है.  

अनुमान के मुताबिक सर्विसेज (सेवाओं) और मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) में तेज गति से रिकवरी देखने को मिलेगी. वहीं, दूसरी तरफ पाकिस्तान कि बात करें तो वर्ल्ड बैंक का कहना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुस्त रहेगी और वित्त वर्ष 2020-21 में 0.5 फीसदी के आसपास बढ़ेगी. 

रिपोर्ट के अनुसार साउथ-एशिया में कोरोना महामारी का प्रभाव कम देखने को मिला है, लेकिन जिन देशों में पर्यटन कमाई या रोजगार का मुख्य साधन है जैसे मालदीव्स,नेपाल, श्रीलंका आदि वहां की अर्थव्यवस्था को कोरोनो के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. 

साउथ-एशिया रीजन की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर में

कोरोना ने पूरे साउथ-एशिया रीजन की अर्थव्यवस्था को ही मंदी के दौर में डाल दिया है. यहां तक कि बांग्लादेश जो कि कोरोना महामारी से पहले एक तेजी से बढ़ने वाला बाजार था, वहां की अर्थव्यवस्था में भी साल 2019-20 में साल 2019-20 में 2 फीसदी की गिरावट आयी है.

रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया में वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है. विश्व बैंक ने 2021 में वैश्विक अर्थव्यवस्था में चार फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया है. 


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