अलग बैरक में रखे जाएंगे हाथरस कांड के चारों आरोपी, चार्जशीट के बाद से नींद-भूख गायब


यूपी के हाथरस गैंगरेप और हत्या मामले के चारों आरोपी अब जेल के अलग-अलग बैरकों में रहेंगे. एक दिन पहले ही सीबीआई ने सभी आरोपियों संदीप, रवि, रामू और लव-कुश के खिलाफ आरोपपत्र दायर किए हैं. जांच एजेंसी ने इन आरोपियों के खिलाफ हत्या, रेप, गैंगरेप, एससी/एसटी एक्ट सहित तमाम धाराओं में चार्जशीट दायर की थी. इसके बाद सभी को अलीगढ़ जेल में बंद कर दिया गया.

फिलहाल ये चारों एक ही बैरक में बंद हैं लेकिन रविवार से इन्हें अलग-अलग बैरक में रखने की तैयारी की गई है. जानकारी के मुताबिक अलीगढ़ जेल प्रशासन ने सभी आरोपियों को अलग-अलग बैरक में रखने का फैसला किया है. बताया जा रहा है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद से चारों आरोपियों की नींद और भूख गायब है. 

हाथरस गैंगरेप और हत्या मामले में शुक्रवार को जब सीबीआई ने चार्जशीट दायर की तो पीड़िता की भाभी सिसकते हुए बोलीं कि, 'उनकी ननद का अंतिम बयान व्यर्थ नहीं गया.' गैंगरेप पीड़िता ने 22 सितंबर को अपनी मौत से पहले बयान में बताया था कि उनके साथ रेप हुआ जो सीबीआई की दो हजार पेज की चार्जशीट का प्राथमिक आधार बना.  

इंडिया टुडे ने हाथरस पीड़िता के परिवार से बातचीत की. बातचीत के दौरान भावुक परिवार ने सीबीआई चार्जशीट के नतीजे पर थोड़ी राहत की सांस ली. पीड़िता के भैया बोले, 'हम जानते हैं कि इससे हमारी बहन वापस नहीं आ जाएगी लेकिन यह ऐसा है जिससे हमें खुशी नहीं मिलेगी, मगर इसे ऐसे देखें कि कम से कम हम जो बोल रहे थे वो सही था.' 

'विश्वास नहीं होता कि वह अब नहीं है'

वहीं पीड़िता की मां घर के बरामदे के कोने में रोती हुई दिखीं. उनके घर के बाहर लगे टेंट में CRPF के कम से कम 80 जवान तैनात दिखे. पीड़िता का परिवार कथित उच्च जातियों के गांव में अकेला दलित परिवार है. रोती हुई मां कहती हैं, 'मैंने सपना देखा कि वह चारपाई पर बैठकर चाय पी रही है. वह अब भी मेरे सपने में आती है. हमें अब भी विश्वास नहीं होता है कि वह अब दुनिया में नहीं है.'

भाभी बोलीं, 'हम यह कहते रहे कि लड़कों ने उसकी इज्जत लूटी जबकि यूपी पुलिस ने हमें पहले दिन से परेशान किया. हम अपने रीति-रिवाजों में अविवाहित लड़की का अंतिम संस्कार नहीं करते हैं, हम उसे दफनाते हैं.'

पुलिस-प्रशासन के खिलाफ भी हो कार्रवाई

हाथरस गैंगरेप पीड़िता की वकील सीमा समृद्धि ने आजतक से खास बातचीत करते हुए कहा कि सीबीआई ने 4 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है, लेकिन जिस प्रशासन ने पीड़िता के शव को परिवार को दिए बिना ही जला दिया उनके खिलाफ अभी तक कोई आरोप सीबीआई की तरफ से दाखिल नहीं किए गए हैं.

उन्होंने आगे कहा कि सीबीआई की तरफ से दाखिल की गई चार्जशीट से अब यह तो साफ हो गया है कि हाथरस का लोकल एडमिनिस्ट्रेशन इस मामले में झूठा ऑनर किलिंग का केस मनाने में लगा हुआ था, और बलात्कार करने वालों को बचाने की कोशिश में था. वहां की लोकल पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ भी इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए

पीड़ित परिवार की बात करते हुए सीमा समृद्धि ने कहा, ''पीड़िता का परिवार अभी भी ऊंची जाति के लोगों के साथ रह रहा है, ऐसे में अभी तो परिवार को सुरक्षा दी गई है लेकिन क्या वह आजीवन काल के लिए है? जब भी सुरक्षा उठाई जाएगी परिवार की जान को उस गांव में हमेशा खतरा रहेगा. मैं हाल ही में उस गांव में गई थी और मुझे खुद वहां के लोगों के ताने सुनने को मिले जो आरोपियों के महिमामंडन करने के साथ-साथ जल्द रिहा होने को लेकर आश्वस्त थे.''

सीमा ने कहा कि निर्भया के मामले की तुलना में मेरे लिए इस मामले को लड़ना थोड़ा ज्यादा मुश्किल है क्योंकि निर्भया के केस में दिल्ली पुलिस ने इंवेस्टिगेशन बेहतरीन तरीके से की, जबकि इस मामले में हाथरस की पुलिस ने पूरे मामले को दबाने और सबूतों को मिटाने की कोशिश की. लेकिन इस लड़ाई में हम आखिर तक लड़ेंगे और हाथरस की बेटी को भी वैसे ही न्याय दिलाकर मानेंगे जैसे निर्भया को दिलाया था.


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