चिराग तले अंधेरा, एनडीए की सीटों पर ही सेंध लगा गए बीजेपी के हनुमान


ज्यादतर एग्जिट पोल्स को गलत साबित करने के बाद बिहार चुनावों के परिणाम आ ही गए. इस लड़ाई में एनडीए को बहुमत प्राप्त हुआ और वहीं तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को 110 सीटों से ही संतोष करना पड़ा. 

अशोका यूनिवर्सिटी के TCPD द्वारा चुनाव आयोग के आंकड़ों को प्रोसेस किए आंकड़ों से इंडिया टुडे की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट ने पाया कि इस बार 120 सीटें ऐसी थीं जहां वोट कटरों ने अपना खेल खेला. इन वोट कटरों में से 54 सीटों पर चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने गेम बिगाड़ा. 

इस चुनाव में 54 ऐसी सीटें थीं जहां चिराग पासवान की लोजपा तीसरे स्थान पर थी, लेकिन इनको मिले वोट, जीत के मार्जिन से ज्यादा थे. तो यदि लोजपा के सारे वोट दूसरे स्थान वाली पार्टी को मिल जाते, तो जरूर पासा पलटता और परिणाम कुछ और होते. 

जद(यू) को भारी नुकसान 

वैसे तो लोजपा केवल एक ही सीट (मटिहानी) जीती लेकिन इसने एनडीए का काफी नुकसान किया. उन 54 सीटों पर जहां लोजपा ने वोट कैंची का काम किया, 25 तो जदयू की थीं. इन सीटों पर लोजपा को जितने वोट मिले, वे जदयू की हार के मार्जिन से ज्यादा थे. 

ठीक यही चिराग का मकसद भी था. पटना में रिपोर्टरों से बात करते हुए चिराग ने कहा कि इस चुनाव में मेरा मुख्य मकसद था कि भाजपा शक्तिशाली बने. मेरी वजह से इस चुनाव में पड़े इम्पैक्ट से मैं काफी खुश हूं. लोजपा केंद्र सरकार की संधि है, लेकिन बिहार में नीतीश से नाराजगी के चलते उसने अकेले चुनाव लड़ा और नीतीश को नीचे लाने की पूरी कोशिश भी की.

भले ही नीतीश एनडीए के साथ थे, लेकिन चिराग पासवान ने भाजपा को पूरा सपोर्ट दिया. उन्होंने अपने आप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान भी घोषित किया और कहा कि वे किसी भी हद तक नीतीश को मुख्यमंत्री नहीं बनने देंगे. 

लेकिन जदयू ने भी बहादुरी से सामना किया. पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन ने आजतक को बताया कि चिराग और उनकी टीम ने इस इलेक्शन में सुसाइड स्क्वाड के जैसा काम किया है और अब नतीजों के बाद उनका भविष्य अंधकार में ही है. 

सिर्फ जदयू ही नहीं लोजपा ने एनडीए की ही मुकेश सहनी की पार्टी विकाशशील इंसान पार्टी (VIP) को भी चार सीटों पर अच्छी चोट पहुंचाई. क्योंकि चिराग भाजपा के खिलाफ ज्यादा सीटों पर नहीं लड़े इसलिए उन्होंने भाजपा की केवल 1 ही सीट पर गेम खराब की. चिराग ने महागठबंधन का भी नुकसान किया लेकिन एनडीए जितने बड़े जख्म नहीं दिए. 

आंकड़े बताते हैं कि चिराग की लोजपा की वजह से राजद को 12 सीटों का नुकसान हुआ और वहीं कांग्रेस को 10 सीटों का. CPI(ML)(L) के हिस्से की भी 2 सीटें लोजपा खा गई. इसका मतलब चिराग पासवान की पार्टी ने 24 सीटों पर महागठबंधन का भी गेम बिगाड़ा.  

चूंकि एक सीट पर किसी का नुकसान हुआ है तो जाहिर है किसी का फयदा भी हुआ होगा. उन सीटों पर जहां चिराग की पार्टी ने कैंची चलाई, ज्यादातर महागठबंधन के उम्मीदवार ही जीते. लोजपा के वोट काटने से राजद को 24 सीटों पर जीत मिली और कांग्रेस को 6 सीटों पर. नीतीश को भी 20 सीटों पर जीत मिली. लोजपा के वोट काटने से जीतनराम मांझी की पार्टी हम को भी 2 सीटें और भाजपा और विकासशील इंसान पार्टी को 1 सीट पर जीत प्राप्त हुई. 

तो ये कहना सही होगा कि लोजपा ने एनडीए को 6 सीटों का नेट नुकसान किया (24 जिताई 30 हराई) और महागठबंधन को 6 नेट सीटों का फायदा पहुंचाया (30 जिताई 24 हराई). 

LJP इकलौती वोट कटर नहीं 

जहां चिराग पासवान को बड़े वोट कटर के रूप में देखा जा रहा है, वहीं उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) भी बड़ी कैंची चलाई. RLSP खुद तो एक भी सीट न जीत पाई लेकिन 14 सीटों पर इसने भी वोट कटर का काम बखूबी किया.

RLSP ने एनडीए के साथ अपने नाते 2018 में ही तोड़ लिए थे लेकिन इस बार भी बसपा और ओवैसी की AIMIM के साथ एक नया फ्रंट बनाकर इसने एनडीए की 10 सीटों का नुकसान किया, जिसमें से 7 तो भाजपा की ही थी. RLSP ने राजद को 7 सीटों पर फायदा पहुंचाया, कांग्रेस और सीपीआई को एक-एक सीट पर जीत दिलवाई. 


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