Bihar Chunav 2020: इस चुनाव के होंगे बड़े नतीजे, प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति की बदलेगी तस्वीर

 Bihar Chunav 2020 चुनाव बिहार में हो रहा है लेकिन इसके बड़े नतीजे के मायने अभी से निकाले जा रहे हैं। परिणाम न सिर्फ हार-जीत तय करेगा, बल्कि सभी प्रमुख दलों की राजनीतिक हैसियत भी तय कर देगा। शायद पहला मौका होगा, जब प्रदेश में पांच गठबंधन चुनावी रण में हैं। इस बार राजग के साथ दो बड़े चेहरे (मोदी और नीतीश) हैं तो महागठबंधन का नेतृत्व संभालने वाले तेजस्वी यादव आत्मविश्वास से लबरेज हैं और फ्रंट से खेल रहे हैं। जनाधार के स्तर पर सिमट चुकी कांग्रेस महागठबंधन में ऑक्सीजन दे रही है। लोजपा ने दोनों गठबंधन से अलग होकर 'हवा' निकालने की भरसक कोशिश की है तो रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में ग्रैंड यूनाइटेड सेक्युलर फ्रंट भी चुनावी रण में वजूद तलाशने में जुटा है। इसलिए राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि चुनाव बाद फिर राजनीतिक समीकरण और संबंध बदलते दिखेंगे।

राजनीतिक समीकरण व संबंध बदलेंगे

हालांकि, चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव बाद फिर राजनीतिक समीकरण और संबंध बदलते दिखेंगे। संभव है कि चुनाव का नतीजा लंबे समय तक के लिए कुछ फॉर्मूले तय कर देगा। यह तय है कि चुनावी नतीजे के बाद राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति का परिदृश्य बदलेगा। इसकी वजहें हैं-चुनाव से पहले बिहार में राजग के पुराने सहयोगी लोजपा का अलग होना। वहीं महागठबंधन के नये स्वरूप में आना।

राजनीतिक समीकरण व संबंध बदलेंगे

हालांकि, चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव बाद फिर राजनीतिक समीकरण और संबंध बदलते दिखेंगे। संभव है कि चुनाव का नतीजा लंबे समय तक के लिए कुछ फॉर्मूले तय कर देगा। यह तय है कि चुनावी नतीजे के बाद राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति का परिदृश्य बदलेगा। इसकी वजहें हैं-चुनाव से पहले बिहार में राजग के पुराने सहयोगी लोजपा का अलग होना। वहीं महागठबंधन के नये स्वरूप में आना।

कांग्रेस व वाम दलों के लिए अस्तित्व का प्रश्न

राजनीतिक विश्लेषक हेमंत के मुताबिक यह चुनाव कांग्रेस और वामपंथी दलों के लिए अस्तित्व का सवाल बन गया है। इन दलों को उनकी खोई हुई सियासी जमीन मिलती है या जनता खारिज करती है। इधर लोजपा के लिए भी यह चुनाव कठिन परीक्षा है। चिराग पासवान के नेतृत्व का दमखम भी इस चुनावी नतीजे से ही पता चलेगा। रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में बना गठबंधन हो या पप्पू यादव के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरा गठबंधन, सबकी राजनीतिक हैसियत चुनावी नतीजे से तय होगी। चुनाव बाद सत्ता के लिए वैचारिक विविधता के बावजूद नया समीकरण बने तो आश्चर्यजनक नहीं होगा।

बेसब्री से चुनाव परिणाम का इंतजार

फिलहाल, हर गठबंधन को 10 नवंबर का बेसब्री से इंतजार है। जाहिर है कि चुनाव तो रोचक है ही, सभी दलों के लिए आत्मविवेचन का मौका भी होगा। यह भी देखना दिलचस्प रहेगा कि भाजपा-जदयू विधानसभा चुनाव में पिछले लोकसभा की करिश्माई सफलता दोहराता है या नहीं। वैसे भाजपा और जदयू को विश्वास है कि बिहार में सरकार उसकी ही बनेगी। वैसे नतीजों के बाद फिर से समीकरण बदलते दिखें तो आश्चर्य नहीं। यही नहीं नतीजे लंबे समय के लिए सभी प्रमुख दलों की जगह भी तय कर देंगे।


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