सर रोजर पेनरोस को मिले नोबेल के बाद जानिए क्यों चर्चा में है 'रायचौधरी इक्वेशन'

ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी सर रोजर पेनरोस को हाल ही में मिले नोबेल पदक के पीछे भारतीय भौतिक विज्ञानी प्रो. अमल कुमार रायचौधरी द्वारा 1955 में दिए गए गणितीय समीकरण की मुख्य भूमिका है। विज्ञान जगत में 'रायचौधरी इक्वेशन' के नाम से विख्यात उस समीकरण को आधार बनाकर ही पेनरोस ने हमवतन भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग के साथ मिलकर ब्लैक होल्स की गणितीय व्याख्या की।

रायचौधरी अब जीवित नहीं हैं। 2005 में बांग्लादेश में उनका देहावसान हुआ। हॉकिंग भी 2018 में दुनिया से चले गए। लेकिन पेनरोस को नोबेल से नवाजे जाने के बाद अमल कुमार रायचौधरी और रायचौधरी इक्वेशन फिर चर्चा में हैं।

अमल और पेनरोस को जानने वाले विज्ञानियों ने बताया कि अमल कुमार रायचौधरी, जिन्हें एकेआर नाम से भी जाना जाता है, अपने समय की महान शख्सियत थे। उन्होंने इस इक्वेशन (समीकरण) पर 1950-55 में काम किया था। उस वक्त वे कोलकाता के आशुतोष कॉलेज में युवा प्रोफेसर थे। उनकी अनुसंधान रिपोर्ट 1955 में प्रकाशित हुई थी। तब वे इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस से जुड़े हुए थे। उसके बाद कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज (वर्तमान में प्रेसिडेंसी यूनिवíसटी) से जुड़ गए थे।

नोबेल कमेटी की ओर से भी मान्यता प्राप्त

उनके इस इक्वेशन को विज्ञान जगत और नोबेल कमेटी की ओर से भी मान्यता प्राप्त है। भौतिक विज्ञान में उकृष्ट योगदान के लिए इस बार का नोबेल पुरस्कार 89 साल के रोजर पेनरोस सहित अन्य दो विज्ञानियों रेनहार्ड जेनजेल और एंड्रिया गेज को मिला है। इन्होंने ब्लैक होल्स के रहस्य को समझने के लिए जो निष्कर्ष दिया, वह नोबेल का आधार बना। इसमें पेनरोस ने अग्रणी भूमिका निभाई। स्टीफन हॉकिंग के साथ मिलकर उन्होंने 1970 में 'पेनरोस-हॉकिंग सिंगुलैरिटी थ्योरम्स' नामक सिद्धांत प्रस्तुत किया, जो रायचौधरी समीकरण पर आधारित है।

जनरल रिलेटिविटी (सामान्य सापेक्षता) की व्याख्या करते हुए यह बताता है कि ब्लैक होल (कृष्ण छिद्र) के केंद्र (सिंगुलैरिटी) से ही ब्रह्मांड शुरु हुआ होगा। सबकुछ अपने में समेट लेने वाला ब्लैक होल अंतत: बिखर कर (बिग बैंग) नवसृजन का कारक बनता है और फिर अंत का भी। द्रव्यमान (मास) और ऊर्जा (एनर्जी) के बीच गुरुत्वाकर्षण बल को आधार बनाकर रायचौधरी का गणितीय समीकरण इस बात को स्थापित करता है।

पेनरोस ने कोलकाता आकर एकेआर से की थी मुलाकात

1987 में पेनरोस ने कोलकाता आकर एकेआर से मुलाकात भी की थी। इसके बाद वह अनेक बार कोलकाता आए। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आइआइएसइआर) के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर नारायण बनर्जी पेनरोस और एकेआर की मुलाकात के साक्षी रहे हैं।

इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे के निदेशक सोमक रायचौधरी, जो एकेआर के शिष्य रहे हैं, बताते हैं कि ऑक्सफोर्ड यूनिवíसटी में पेनरोज उनसे एकेआर के बारे में चर्चा किया करते थे। सोमक तब वहां अध्ययन के लिए गए थे। पेनरोस को जब यह पता चला कि सोमक कोलकाता से हैं तो उन्होंने उनसे एकेआर का कुशलक्षेम पूछा और अनुभव साझा किये।

भौतिक विज्ञानी सौमित्र सेनगुप्ता बताते हैं कि एकेआर ऐसी शख्सियत रहे हैं, जिन्होंने कभी कोई पुरस्कार जीतने की भावना से काम नहीं किया।


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