GST विवाद में सुलह के संकेत, केंद्र सरकार लेगी 1.1 लाख करोड़ उधार, राज्यों को मिलेगा लोन

जीएसटी क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर 12 अक्टूबर की बैठक में भी सहमति नहीं बन पाई थी. अब वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार राज्यों की GST में कमी को पूरा करने के लिए 1.1 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेगी. 

वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि कर्ज ली गई राशि राज्यों को दिया जाएगा. केंद्र के मुताबिक राज्यों को जीएसटी कम्पनसेशन सेस रिलीज के बदले धीरे-धीरे लोन के तौर पर यह फंड दिया जाएगा. जीएसटी में कमी की भरपाई के​ लिए केंद्र ने अगस्त में राज्यों को दो प्रस्ताव दिए थे.

केंद्र ने दिए राज्यों को ये दो विकल्प

केंद्र के प्रस्ताव के तहत राज्य RBI द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली विशेष सुविधा के जरिये 97,000 करोड़ रुपये कर्ज ले सकते थे या फिर बाजार से 2.35 लाख करोड़ रुपये का कर्ज ले सकते थे. केंद्र के पहले प्रस्ताव से 21 राज्य सहमत हैं, लेकिन बाकी राज्यों ने ठुकरा दिया.

अब कुछ राज्यों की मांग के बाद पहले विकल्प के तहत उधार की विशेष कर्ज व्यवस्था को 97 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.11 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. पहले विकल्प के तहत राज्य अपने लिए निर्धारित कर्ज की राशि में से इस्तेमाल न हो सके हिस्से को अगले वित्त वर्ष में कैरी फॉरवर्ड कर सकेंगे.

वित्त मंत्रालय के मुताबिक इस विशेष कर्ज व्यवस्था के तहत राज्यों को जीएसटी में 1.1 लाख करोड़ रुपये की कुल अनुमानित कमी को पूरा करने के लिए भारत सरकार उपयुक्त किस्तों में कर्ज के तौर पर लेगी. इससे भारत सरकार के राजकोषीय घाटा पर कोई असर नहीं होगा.

क्या है मुआवजे का गणित 

राज्यों का करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा बकाया है, लेकिन केंद्र सरकार का गणित यह है ​कि इसमें से करीब 97,000 करोड़ रुपये का नुकसान ही जीएसटी लागू होने की वजह से है, बाकी करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान कोरोना महामारी और लॉकडाउन की वजह से है. 


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