Ram Vilas Paswan Death: पासवान के बाद आसान नहीं चिराग की राह, बिहार चुनाव में अग्निपरीक्षा भी तय

Ram Vilas Paswan Death: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के संस्थापक रहे राम विलास पासवान (Ram Vilas Paswan) शनिवार की शाम पंचतत्‍व में विलीन हो गए। इसके साथ ही लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान के सिर से सियासी संतुलन (Political Balance) बनाए रखने वाला हाथ भी उठ गया है। चिराग ने एलजेपी पर मजबूत पकड़ बनाई है, साथ ही बिहार में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का विरोध करते हुए राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में केंद्र की सत्‍ता में संतुलन भी बनाया है, लेकिन पिता की गैर मौजूदगी में अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखना उनकी बड़ी चुनौती होगी। इसमें 2020 का विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) भी किसी अग्नि परीक्षा (Acid Test) से कम नहीं होगा।

चिराग ने अभी तक लिए हैं दो बड़े सियासी फैसले

एलजेपी की कमान संभालने के बाद चिराग पासवान ने दो बड़े सियासी फैसले लिए हैं। पहला झारखंड में एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने का तो दूसरा मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उनके खिलाफ बिहार में एनडीए से अलग होने का। चिराग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) में आस्‍था प्रकट करते हुए कहा है कि अगर बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्‍व में सरकार बनी तो उनकी पार्टी उसे समर्थन देगी।

जेडीयू की खिलाफत के दूरगामी परिणाम होने तय

जाहिर है, चिराग पासवान के इस बयान के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। चिराग ने जिस तरह नीतीश कुमार पर हमलावर होते हुए बिहार में एनडीए से अलग हो कर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया, उसके दूरगामी परिणाम तय हैं। एलजेपी के प्रत्‍याशी अगर बड़े पैमाने पर वोट काटने में सफल रहे तो कई सीटों पर जेडीयू का परिणाम प्रभावित हो सकता है। ऐसा हुआ तो चुनाव परिणाम के बाद के अंकगणित में बीजेपी 'बड़ा भाई' (Big Brother) बन कर उभर सकती है।

एनडीए में सत्‍ता समीकरण बदलना चाहते हैं चिराग

बीजेपी ने पहले से ही घोषित कर रखा है कि चुनाव परिणाम जो भी रहें, एनडीए के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ही बनेंगे, लेकिन बीजेपी तथा एलजेपी को अधिक सीटें मिलने पर चिराग बिहार में एनडीए का सत्‍ता समीकरण बदलने की कोशिश तो कर ही सकते हैं। चिराग यही चाहते भी हैं। चिराग कहते हैं कि बिहार में बीजेपी के नेतृत्‍व में सरकार बननी चाहिए, जिसका वे समर्थन करेंगे। अगर ऐसा हुआ तो चिराग बिहार की राजनीति में किंग मेकर (King Maker) की भूमिका में नजर आएंगे। ऐसा हीं भी हुआ, लेकिन एलजेपी को पहले से अधिक सीटें मिलीं और वह जेडीयू के चुनाव परिणाम को प्रभावित कर बीजेपी को बढ़त दिलाने में कामयाब रही, तब भी चिराग का मकसद सधता दिख रहा है। ऐसी स्थिति में भी चिराग मजबूत होकर उभरेंगे।

पार्टी व परिवार को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती

लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तब? जा‍हिर है, तब चिराग को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। तब चिराग के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है। राम विलास पासवान पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ रह स्‍तर पर घुलते-मिलते रहते थे। पार्टी कार्यकर्ताओं को प्राेत्‍साहित करते हुए संतुलन बिठाकर चलना चिराग के लिए आसान नहीं होगा, क्‍योंकि अभी तक वे कार्यकर्ताओं से अधिक घुलते-मिलते नहीं रहे हैं। चिराग के सामने पार्टी के साथ परिवार को भी एकजुट रखने की चुनौती है। राम विलास पासवान ने परिवार को कई लोगों की राजनीति में एंट्री कराई। वे पार्टी में अहम स्‍थान रखते हैं। परिवार को सहजेकर रखने से पार्टी में भी मजबूती मिलनी तय है।

क्‍या पिता की तर‍ह बन पाएंगे बड़ा दलित चेहरा?

राम विलास पासवान बिहार की राजनीति की हर नब्ज को पहचानते थे। उन्‍होंने जिस तरह बिहार और केंद्र की राजनीति में तालमेल बैठाते हुए आधी सदी तक राजनीति में अपनी अहमितयत बनाए रखी, वह साधारण बात नहीं है। राम विलास पासवान के निधन के साथ बिहार की राजनीति का एक बड़ा दलित चेहरा भी नहीं रहा। उन्‍होंने हर वर्ग से तालमेल बैठाते हुए दलित राजनीति (Dalit Politics) को अपना आधार बनाए रखा। ऐसा कर पाना भी चिराग पासवान के सामने बड़ी चुनौती होगी। खास कर तब, जब बिहार में कांग्रेस (Congress) की मीरा कुमार (Meira Kumar) से लेकर हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (HAM) के जीतनराम मांझी (Jiranram Manjhi) तक कई दलित चेहरे पहले से मौजूद हैं।


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