लॉकडाउन: हरियाणा में धड़ल्ले से हो रही शराब की बिक्री, विपक्ष ने उठाए सवाल


हरियाणा में 25 मार्च से लागू लॉकडाउन के बावजूद शराब की अवैध बिक्री लगातार जारी है. आंकड़े बेहद हैरान करने वाले हैं, तो वहीं इस पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है. हालांकि, मौजूदा सरकार के तमाम मंत्री पकड़ी गई अवैध शराब को अपनी उपलब्धि बता रहे हैं.

विपक्ष का यह कहना है कि सरकार की मिलीभगत के बिना शराब बनाने वाली फैक्ट्रियां अवैध रूप से शराब बेच ही नहीं सकती. सरकार की कार्यप्रणाली पर विपक्ष ने सवाल उठाए. वहीं इसमें वह शराब भी शामिल है जो अवैध रूप से स्थानीय फैक्ट्रियों में बनाई जा रही है और जो कभी भी लोगों की मौत का सामान बन सकती है.

हरियाणा में प्रतिदिन करीब 5,825 शराब की बोतलें लॉकडाउन के दौरान पकड़ी जा रही हैं. इन मामलों को लेकर अब तक करीब 1,200 एफआईआर दर्ज की गई है और 1,285 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि 173 आरोपी फरार हैं. एक्साइज एक्ट के तहत इन सब लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है

सवाल ये है कि जब प्रदेश में शराब के ठेके बंद हैं और शराब का प्रोडक्शन भी फैक्ट्रियों में नहीं हो रहा, तो इतनी भारी मात्रा में अवैध रूप से शराब कहां से आ रही है.

.प्रदेश में अब तक 84,537 अंग्रेजी और 72,727 देसी शराब की बोतलें पकड़ी जा चुकी हैं. 6,321 बीयर, 108 कच्ची शराब की बोतलें, 14,830 किलो लहान और 14325 लीटर लहान (शराब बनाने का मेटेरियल) और कुल 49,919.25 लीटर शराब पकड़ी जा चुकी हैं.

हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला (उनके पास एक्साइज विभाग भी है) ने हरियाणा में लगातार पकड़ी जा रही अवैध शराब के मामले पर कहा कि एक्साइज डिपार्टमेंट और पुलिस लगातार सतर्क है. उचित कार्रवाई करते हुए लगातार अवैध शराब की धरपकड़ की जा रही है. सरकार की सख्ती के कारण ही ये सबकुछ हो रहा है.

हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज कहते हैं कि शराब का मामला उनके अधीन नहीं आता है, लेकिन पुलिस उनके अधीन है. इसलिए गंभीरता के साथ अवैध शराब की लगातार छापेमारी और बरामदगी हो रही है. अवैध शराब को रोकने के लिए सरकार कार्रवाई कर रही है.

वहीं, विपक्ष ने सरकार पर जमकर निशाना साधा है. आईएनएलडी के विधायक अभय सिंह चौटाला ने शराब और आबकारी कराधान मंत्री व अपने सगे भतीजे दुष्यंत चौटाला पर आरोप लगाया है कि सरकार हर कीमत पर जल्द से जल्द शराब के ठेकों को खोलना चाहती है, यही वजह है कि अवैध शराब लगातार बेची जा रही है, ताकि इसकी आड़ में सरकार को शराब कंपनियों को अनुमति देनी पड़े. अन्यथा ऐसा हो ही नहीं सकता कि सरकार की अनुमति के बिना शराब बनाने वाली फैक्ट्रियां अवैध रूप से शराब को बेच सकें.