US President India Visit: जानें, ट्रंप के भारत के दौरे से अमेरिका को क्या मिला?


अमेरिकी हितों के लिहाज से देखें तो US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का भारत दौरा हर तरह से पॉजिटिव साबित हुआ है. अमेरिका ने भारत से 3 अरब डॉलर का बड़ा डिफेंस डील करने में कामयाबी हासिल की. इस बार कोई बड़ी ट्रेड डील नहीं हो पाई, लेकिन कई छोटी-छोटी डील अमेरिका के लिए फायदेमंद है. साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ और 5 जी जैसे मसलों पर बेबाकी से अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाने में कोताही नहीं की.

गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप सोमवार को दो दिवसीय भारत यात्रा पर अहमदाबाद पहुंचे थे और उसी दिन रात में वह दिल्ली पहुंचे थे. मंगलवार की रात वह वापस अपने देश चले गए. अपनी भारत यात्रा के दूसरे दिन डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम मोदी के अलावा देश के कारोबार जगत के करीब एक दर्जन दिग्गजों से मुलाकात की.

3 अरब की डिफेंस डील

भारतीय सेना ने अमेरिकी कंपनियों बोइंग और लॉकहीड मार्टिन के साथ सैन्य हेलीकॉप्टर की खरीद के लिए समझौता किया है. अमेरिका से भारत करीब 3 अरब डॉलर के अमेरिकी सैन्य साजो-सामान खरीदेगा. इनमें अपाचे और एमएच 60 रोमियो हेलीकॉप्टर शामिल हैं. अभी दोनों देशों के व्यापार में भारत करीब 17 अरब डॉलर का सरप्लस है यानी व्यापार भारत के पक्ष में झुका हुआ है. इस रक्षा सौदे के लागू होने के बाद भारत का यह सरप्लस घट जाएगा.

सामरिक साझेदारी

ग्लोबल सामारिक सझेदारी के लिए भारत-अमेरिका आगे बढ़े हैं. दोनों नेता क्वाडिलैटरल इनिश‍िएटिव (क्वाड) को गति देने पर सहमत हुए हैं, जो कि हिंद-प्रशांत सामरिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण तत्व है. इस इलाके में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए यह दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी साबित हो सकती है. पिछले 15 साल में भारत इस तरह से सीधे चीन के सामने आने से बचता रहा है. इस हिसाब से ट्रंप के लिए यह एक अच्छी सफलता है.

FTA की ओर बढ़े कदम

अमेरिका कई दशकों से इस बात के लिए दबाव बना रहा है कि भारत उसके साथ मुक्त व्यापार समझौता करे, लेकिन इस बारे में पहले चली बातचीत सफल नहीं रही. इससे भारतीय कारोबारियों के हितों को नुकसान का अंदेशा जताया जाता रहा है. अब दोनों नेता इस बात पर सहमत हो गए हैं कि इस दिशा में फिर बातचीत शुरू की जाए. इस तरह से यह अमेरिका के लिए एक बड़ी सफलता है कि कम से कम इस दिशा में बातचीत आगे तो बढ़ रही है. यह भारत के रुख में एक तरह से नरमी का संकेत है.

मेडिकल डिवाइस पर समझौता

भारत के सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन और अमेरिका के यूएस फूड ऐंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के बीच एक समझौता हुआ है. इसके तहत दोनों देश इस संबंध में क्षमता निर्माण के बारे में जानकारियों का आदान-प्रदान करेंगे. असल में भारत में अभी कॉर्डियक स्टेंट जैसे मेडिकल डिवाइस की कीमत पर मोदी सरकार ने काफी नियंत्रण लगा रखा है, अमेरिकी कंपनियां इस बारे में जबरदस्त लॉबीइंग कर रही हैं कि इसमें ढील दी जाए. भारत सरकार ने संकेत दिया है कि इस साल 1 अप्रैल से सभी मेडिकल डिवाइस को दवाओं की तरह ही माना जाएगा. इसके बाद कीमत में क्या बदलाव आता है, यह देखना होगा.

भारत में अमेरिकी प्राकृतिक गैस की पहुंच

ट्रंप की यात्रा के दौरान मंगलवार को एक और बड़ा कारोबारी समझौता हुआ है अमेरिकी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की भारतीय बाजार में पहुंच के बारे में. यह समझौता भारत की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और अमेरिका की एक्सन मोबिल तथा चार्ट एनर्जी ऐंड केमिकल्स इंक के बीच हुआ है. अमेरिकी कंपनी की भारतीय शाखा भारत में प्राकृतिक गैस आपूर्ति करेगी. इसके तहत उन इलाकों में रोड, रेल और जलमार्ग सेएलएनजी की आपूर्ति की जाएगी, जो पाइपलाइन से नहीं जुड़े हैं.

मेंटल हेल्थ पर एमओयू

दोनों देशों के बीच मेंटल हेल्थ को लेकर भी एक समझौता हुआ है. यह समझौता भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और अमेरिका के स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्रालय के बीच हुआ है.

5 जी पर अमेरिकी हित

ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 5जी नेटवर्क से चीनी कंपनियों को बाहर रखने के लिए भारत सरकार को प्रभावित किया है. उन्होंने कहा, '5 जी को आजादी, तरक्की और समृद्धि का एक साधन होना चाहिए.' सीईओ बैठक में रिलायंस इंडस्ट्रीज के सीएमडी मुकेश अंबानी ने जब यह कहा कि उनकी कंपनी बिना चीनी उपकरणों के 5जी के लिए आगे बढ़ रही है तो इस पर ट्रंप मुस्करा पड़े.

टैरिफ पर रखी दी अपनी बात

भारत और पीएम मोदी की तमाम तारीफों के बीच भी ट्रंप अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए सख्त साबित हुए. यहां से जाते-जाते उन्होंने भारत को टैरिफ किंग बता दिया. उन्होंने हार्ले डेविडसन बाइक का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत द्वारा ज्यादा टैरिफ लगाने की वजह से ही यहां अमेरिका से आने वाली हार्ले डेविडसन बाइक काफी महंगी पड़ती है. उन्होंने कहा कि किसी भी बड़ी ट्रेड डील की दिशा में भारत को आगे बढ़ना है तो पहले टैरिफ कम करने होंगे.