तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिह्न छिनने पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का तंज, बोले -'अहंकार का पतन'


कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे घमासान और चुनाव आयोग के कड़े फैसले पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। निर्वाचन आयोग द्वारा ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी दोनों ही प्रतिद्वंद्वी शिविरों के लिए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतरिम रोक लगाने के बाद, मुख्यमंत्री ने इसे अहंकार का पतन करार दिया है।

आगामी विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले आए इस फैसले से दोनों गुटों को बड़ा झटका लगा है। आयोग के निर्देशानुसार, अब कोई भी पक्ष 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम का उपयोग नहीं कर सकेगा और उनका पारंपरिक 'घास पर जोड़ा फूल' चुनाव चिह्न भी फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है। इसके चलते दोनों गुटों को चुनावी मैदान में उतरने से पहले नए नाम और नए प्रतीकों की तलाश करनी होगी।

पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में कि ममता बनर्जी ने कभी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 'वैनिश कुमार' कहा था और आज उनकी अपनी पार्टी ही गायब हो गई है, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने निर्वाचन आयोग के निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी टूट और पार्टी की बदहाली के लिए भाजपा की कोई भूमिका नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा। चुनाव आयोग ने अपने नियमों के तहत और सभी पक्षों की बात सुनने के बाद यह फैसला लिया है। वह (ममता बनर्जी) अपनी पार्टी को एकजुट नहीं रख पाईं। पार्टी में तीन-चार फाड़ हो चुकी है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की है। इसमें भारतीय जनता पार्टी की कोई सीधी भूमिका नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस की इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व स्थिति के लिए मुख्यमंत्री ने ममता बनर्जी के नेतृत्व के अहंकार को जिम्मेदार ठहराया। मतगणना की रात हल्दिया में दिए गए अपने पुराने बयान को याद करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने उस रात ही कहा था कि बाकी सब रहें या न रहें, ये लोग नहीं रहेंगे।" इसके बाद एक संस्कृत की कहावत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "अति दर्पे हता लंका, अतिमाने च कौरवाः। जिसका भी अहंकार होता है, भगवान उसे चूर-चूर कर देते हैं। सर्वशक्तिमान ईश्वर सब देख रहे हैं।"

मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि तृणमूल के इस पतन के पीछे हिंदू धर्म के प्रति उनका अपमान और संतों-देवताओं का विरोध करना भी एक बड़ा कारण है। उन्होंने आरोप लगाया, "हिंदू धर्म को 'गुंडा धर्म' कहना, महाकुंभ को 'मृत्यु कुंभ' बताना और राम मंदिर के उद्घाटन के दिन 'राम मंदिर नहीं मानेंगे' कहकर जुलूस निकालना, भगवान पुरुषोतम राम चंद्र महाराज के अभिशाप से ही सब कुछ नष्ट हो गया है।"

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