किसान आंदोलन में हिस्सा लेने आई बंगाल की युवती से गैंगरेप, टिकरी बॉर्डर की घटना, 6 लोगों पर केस दर्ज


चंडीगढ़: किसान आंदोलन में हिस्सा लेने दिल्ली आई पश्चिम बंगाल की 25 साल की एक कार्यकर्ता से कथित गैंगरेप के मामले में हरियाणा पुलिस ने 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। गैंगरेप की घटना टिकरी बॉर्डर की है। पीड़िता बाद में कोरोना पॉजिटिव हो गई थी और उसका निधन हो गया है।

इन आरोपियों की पहचान अनिल मलिक, अनुप सिंह, अंकुश संगवान, जगदीश बरार के तौर पर हुई है। साथ ही दो महिलाएं भी इसमें शामिल हैं। मिली जानकारी के अनुसार इन लोगों ने टिकरी बॉर्डर ’किसान सोशल आर्मी’ बैनर के तहत अपना टेंट लगाया था। इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 365, 342, 376 (डी) ,506. 120 (बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पश्चिम बंगाल से आरोपियों के साथ आई थी पीड़िता

 रिपोर्ट के अनुसार एफआईआर में दर्ज जानकारी के अनुसार किसानों के एक दल ने 1 अप्रैल को बंगाल के हूगली में एक आम सभा की थी। इसमें आरोपी भी शामिल हुए थे। इसी दौरान पेशे से कलाकार और डिजायनर रही पीड़िता इन आरोपियों के संपर्क में आई थी। इसके बाद युवती ने अपने माता- पिता को इस बात के लिए राजी किया वे उसे किसानों का समर्थन जताने के लिए दिल्ली जाने दें।

इसके बाद 11 अप्रैल को पंजाब जाने के क्रम में एक आरोपी अनिल मलिक ने ट्रेन में युवती के साथ बदतमीजी करने की कोशिश की। हालांकि, युवती के विरोध करने के बाद वह वहां से चला गया। एफआईआईर में बताया कि 12 अप्रैल को जब पीड़िता दिल्ली बॉर्डर आंदोलन वाली जगह पर पहुंची तो उस पर आरोपी के साथ टेंट शेयर करने के लिए दबाव बनाया गया।

किसान नेताओं के पास पहुंचा मामला तो बस टेंट बदलवा दिया

घटना को लेकर युवती ने अपने पिता को भी फोन पर बताया कि यहां कुछ लोग अच्छे नहीं है और उसपर दवाब डाला जा रहा है और उसे ब्लैकमेल किया जा रहा है। इसके बाद पीड़िता के परिवार ने इस मामले के बारे में किसान नेताओं को भी बताया उसके बयान की भी वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। पीड़िता को फिर दूसरी महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दूसरे टेंट में शिफ्ट कर दिया गया।

हालांकि 21 अप्रैल को महिला को बुखार आया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया , जहां पता चला कि वह कोविड-19 पॉजिटिव है। इलाज के दौरान उसके पिता जब उससे अस्पताल में मिले तो उसने बताया कि आरोपी ने ट्रेन और टेंट में उसका रेप किया था।

साथ ही युवती ने यह गुजारिश भी की कि आरोपी को सजा मिलना चाहिए लेकिन किसान आंदोलन को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। कोविड के इलाज के दौरान ही युवती का 30 अप्रैल को निधन हो गया।

एफआईआर में देरी पर किसान नेताओं के पास जवाब नहीं

इतनी बड़ी घटना के बावजूद किसान नेताओं के पास इस बात का जवाब नहीं है कि उन्होंने पूरी घटना को लेकर एफआईआर कराने में देरी क्यों हुई। जबकि पीड़िता ने पहले ही इस घटना के बारे में बताया था और इसलिए उसका टेंट भी बदला गया था।

संयुक्ता किसान मोर्च (एसकेएम) के नेताओं ने बताया कि उन्हें युवती के साथ टिकरी बॉर्डर पर यौन उत्पीड़न की जानकारी मिली थी और उन्होंने मामला सामने आने के बाद अपने स्तर पर जांच की। किसान मोर्चा के अनुसार, युवती के दावे को सही पाए जाने के बाद कार्रवाई की गई।

हालांकि, किसान मोर्चा इस सवाल पर कोई जवाब नहीं दे सका कि ऐसे मामले में पुलिस से संपर्क क्यों नहीं किया गया जबकि युवती के दावे सही पाया गया था और किसान सोशल आर्मी का कैंप भी धरणास्थल से हटा दिया गया था।