केंद्रीय टीम से मिले विपक्षी दल, कांग्रेस, वाममोर्चा ने एम्फन को ‘राष्ट्रीय आपदा’ का दर्जा दिए जाने कि मांग की


एम्फन तूफान से हुई तबाही के आकलन के लिए बंगाल के दौरे पर आई इंटर मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम (आइएमसीटी) से शनिवार को कोलकाता में विपक्षी भाजपा, कांग्रेस और माकपा के प्रतिनिधियों ने अलग- अलग मुलाकात की। इस दौरान चक्रवात एम्फन को “राष्ट्रीय आपदा” घोषित किये जाने की मांग करते हुए विपक्षी दल कांग्रेस और माकपा ने केंद्रीय दल से कहा कि नुकसान का समुचित आकलन करें जिससे प्रभावित लोगों को केंद्र सरकार की तरफ से जरूरी सहायता मिलना सुनिश्चित हो सके।

वहीं, पिछले साल हुए लोकसभा चुनावों में राज्य में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरी भाजपा ने हालांकि इस बात पर जोर दिया कि केंद्र से मिलने वाली आर्थिक सहायता सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (साइबर और सूचना सुरक्षा) अनुज शर्मा के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम गुरुवार शाम में यहां पहुंची थी। टीम ने शुक्रवार व शनिवार को चक्रवात प्रभावित उत्तर व दक्षिण 24 परगना जिले के विभिन्न स्थानों का दौरा किया। वहीं, केंद्रीय टीम से मुलाकात के बाद विधानसभा में वाममोर्चा के नेता और माकपा विधायक सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि केंद्र सरकार को यथाशीघ्र राहत पैकेज जारी करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हम केंद्रीय दल के दौरे का स्वागत करते हैं और चाहते हैं कि केंद्र एम्फन को राष्ट्रीय आपदा घोषित करे। घरों को फिर से बनाने और लोगों के पुनर्वास के लिये जो भी राहत पैकेज जरूरी हो वह यथाशीघ्र लोगों को मिलना चाहिए।”वहीं कांग्रेस नेता अब्दुल मन्नान ने कहा कि अगर चक्रवात को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों का ध्यान और मदद इस तरफ आएगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्रा ने कहा कि दल द्वारा सावधानीपूर्वक किये गए नुकसान के आकलन के बाद जारी होने वाली केंद्रीय राहत सीधे पीड़ितों को फायदा पहुंचाने वाली होनी चाहिए।

वहीं, मुलाकात के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय टीम से तूफान से प्रभावित लोगों के बैंक खाते में सीधे आर्थिक मदद भेजने सहित शिकायतों के लिए वेबसाइट और एेप लांच करने की मांग की। घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री 5 लाख प्रभावित परिवारों को 20-20 हजार रुपये देने की बात कही है, लेकिन 2.5 लाख परिवार को भी यह राशि नहीं मिली है। आरोप लगाया कि इसमें भी कट मनी खाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा उपाध्यक्ष प्रताप बनर्जी प्रभावित इलाकों का दौरा कर लौटे हैं। बांध टूटे हैं, लेकिन उनकी मरम्मत मिट्टी से किया जा रहा है।

उन्होंने केंद्रीय एजेंसी की अगुआई में कंक्रीट बांध का निर्माण करने की मांग की, ताकि वे स्थाई रह सके। इसके साथ ही पूरे कामकाज को देखने के लिए 6 माह के लिए एक नोडल ऑफिसर की नियुक्ति की भी मांग की। उन्होंने कहा कि आइला के समय केंद्र सरकार ने 5,032 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन उनका हिसाब अभी तक नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि राहत सामग्री वितरण में राजनीति की जा रही है और जब इसकी शिकायत अधिकारी के पास करने भाजपा के कार्यकर्ता जा रहे हैं, तो उनके साथ मारपीट की जा रही है।

उन्होंने केंद्र सरकार से इस बाबत एक वेबसाइट या एप बनाने की मांग की, जिसमें सीधे प्रभावित लोग शिकायत दर्ज कर सकें। इधर, प्रभावित क्षेत्रों का दौरा व राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद केंद्रीय टीम शनिवार शाम में वापस दिल्ली लौट गई। 

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