जब पाकिस्तान में फिरोज खान ने की भारत की तारीफ, लग गया था एंट्री पर बैन


भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कई दिग्गज हुए हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हुए हैं जिन्होंने हर क्षेत्र में महारत हासिल की है. एक ऐसे ही शख्स थे बेहतरीन एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर फिरोज खान. फिरोज खान ने अपने शानदार करियर में कई हिट फिल्मों में काम किया और कई किरदार तो ऐसे निभाए जो आजतक याद किए जाते हैं. आज भी फिल्म इंडस्ट्री में उनका न होना काफी खलता है.

पाकिस्तान में पाक कलाकारों से भिड़ गए फिरोज

फिरोज खान को इस दुनिया को अलविदा कहे 11 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन उनकी आवाज आज भी दर्शकों के कानों में गूंजती है. फिरोज खान एक्टिंग के अलावा अपनी बेबाकी के लिए भी जाने जाते थे. उनकी बेबाकी का एक ऐसा ही किस्सा है पाकिस्तान से. पाकिस्तान में फिरोज खान ने भारत की तारीफ कर दी थी. इस बात से वहां का प्रशासन इतना भड़क गया था कि उनकी पाकिस्तान में एंट्री तक पर बैन लगा दिया गया था.

दरअसल साल 2006 में फिरोज अपने भाई अकबर खान की फिल्म ताज महल के प्रमोशन के लिए पाकिस्तान गए थे. वहां पर एक महफिल में उनकी पाकिस्तानी सिंगर और एंकर फख्र ए आलम से कहासुनी हो गई. कहा जाता है कि फिरोज ने हिंदुस्तान की तारीफ करते हुए कह दिया था कि हमारे यहां हर कौम तरक्की कर रही है और इस्लाम के नाम पर बना पाकिस्तान पिछड़ रहा है. इसके बाद भारत में पाकिस्तानी हाई कमिश्नर को निर्देश दिया गया था कि इस शख्स को पाकिस्तान का वीजा न दिया जाए.

एक्टर से सुपरस्टार बने फिरोज खान

फिरोज खान का साल 25 सितंबर 1939 को बेंगलुरु में जन्म हुआ था. फिरोज खान का परिवार मूल रूप से अफगानिस्तान गजनी का रहने वाला था और उनकी मां ईरानी थीं. फिरोज खान पांच भाई-बहन थे. फिरोज के अलावा उनके भाई संजय खान भी बॉलीवुड का जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं.

फिरोज खान को समझ आ गया था कि फिल्मो में प्रोड्यूसर का रोल अहम होता है. नतीजतन, 1971 में उन्होंने फिल्में प्रोड्यूस भी करना शुरू किया. बतौर प्रोड्यूसर उनकी पहली फिल्म थी अपराध. इसमें जर्मनी में होने वाली कार रेसिंग के सीन दिखाए गए. फिल्म में उनके साथ थीं मुमताज. फिल्मों का सिलसिला जारी रहा और साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म वेलकम उनकी आखिरी फिल्म रही.

जिंदगी के आखिरी वक्त में फिरोज खान ने मुंबई का मोह छोड़ अपने बेंगलुरु के बाहरी हिस्से में बने फार्म हाउस में वक्त बिताना शुरू कर दिया. उन्हें कैंसर डायगनोस हुआ था. लंबे वक्त तक मुंबई में इलाज चला. फिर जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए तो फिरोज आखिरी वक्त का सुकून पाने अपने फार्म हाउस लौट गए. यहीं 27 अप्रैल, 2009 को 69 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था.