शेयर मार्केट: लाकडाउन में शेयर मार्केट होटल और फार्मा इंडस्ट्री ?


सर्वमंगला मिश्रा
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फार्मा इंडस्ट्री की तबियत शेयर मार्केट में अब सुधर रही है। कोरोना ने यूं तो महामारी की तलवार चहूं दिशा में चला रखी है जिससे कि डाउ, नैसडैक से लेकर एशियाई शेयर मार्केट भी लुढ़क गए थे। विश्व गुरु भारत ने महामारी की कमर तो अमूमन तोड़ने के लिए तैयार दिख रही है। भारतीय फार्मा कंपनियां जिनसे अमेरिका से लेकर रसिया और पाकिस्तान से लेकर श्रीलंका तक सभी लाइन में खड़े हैं।भारत ने महामारी को सुनहरे अवसर में तब्दील कर लिया है। जिससे फार्मा कंपनियां के लिए अमेरिका के दरवाजे खुल गए हैं। सिप्ला, ल्यूपिन, कैड़िला, डा. रेड्डीज़, आईपीसीए, डिविज़ लैब और डा. लाल पैथ लैब के भाव शेयर मार्केट में अपनी अच्छी पकड़ बनाए हुए हैं। लाकडाउन के सीज़न में फार्मा कंपनियां ही शेयर मार्केट की उम्मीद की किरण नजर आ रही है। कोरोना टेस्टिंग के लिए लैबोर्टर्रीज़ भी अच्छी मुनाफा वाली कंपनियां लोगों के दिमाग में अपना घर बना चुकीं है। 

लाकडाउन में बाधित हुआ टूरिज्म सेक्टर के कारण इंटरग्लोब एविएशन, स्पाइस जेट, जेट एयरवेज, ग्लोबल वेक्ट्रा जैसी कंपनियों के शेयर रो रहे हैं। वहीं आने जाने पर रोक लगने के कारण होटल इंटस्ट्री में उथल पुथल मच गई है। होटल इंटस्ट्री कोरोना के कारण डूबने के कगार पर आ पहुंची है। भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व की यही हालत है। आज लोग घर से नहीं निकल रहे डर के कारण घूमने जाना तो लोग जैसे भूल ही गए हैं। गलती से याद भी रह जाए तो कोरोना का आतंक उन्हें कहीं जाने की अनुमति साल भर तो किसी भी कीमत पर नहीं देगा। अब चाहे वो ओबेराँय होटल ग्रूप हो, आईएचसीएल, जे. डब्लू मैरिओट या ओयो होटल चेन सब दोहरी मार झेल रहे हैं। 10- 15 प्रतिशत मार्केट गिर चुका था। जापान, हांगकांग, सिंगापुर, जर्मनी, फ्रांस, पेरिस, स्वीडन और अमेरिका जैसे देश की कंपनियां भी कोरोना के आतंक से खुद को नहीं बचा पाईं। ऐसे में शेयर मार्केट पर लिस्टेड कंपनियां भी रो रही हैं। 

एक रिपोर्ट के मुताबिक 620 करोड़ का घाटा झेल रही होटल इंडस्ट्री कैसे और कब उबरेगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल सा लगता है। एशियन होटल, लेमन ट्री, ताज, ओरिएंटल, कामत, महिन्द्रा होलीडे, होटल लीला, कंट्री क्लब और राँयल आँरचिड जैसी कंपनियों के भाव यूं ही इतने नीचले स्तर पर आगए हैं जैसे लूडो के खेल में 99 तक पहुंच कर साँप के काटने से सीधे नीचे आ गिरता है। ऐसी ही कुछ हालत होटल इंडस्ट्री की हो गई है। होटल इंडस्ट्री ने सरकार से राहत पैकेज की मांग भी की क्योंकि उबरने के कोई आसार तो नजर नहीं आ रहे। 

कोरोना का कहर खत्म हो भी जाए तो जल्दी कोई जान जोखिम में नहीं डालना चाहेगा। होटल के कमरों में जहां नए साल पर भीड़ लगी होती थी वहीं इन आलीशान होटलों को कोई पूछने वाला नहीं रह गया। जिस कारण हजारों की संख्या में कर्मचारियों को निकालने की बात सामने आ रही है अथवा 30- 40 प्रतिशत सैलरी में कटौती की जा रही है। ऐसे में लोन लिया हुआ वर्ग बुरी तरह से फंस गया है क्योंकि लोन चुकाना है और घर खर्च भी पर सैलरी अगर दो तोड़ में आती है या नौकरी ही नहीं रही तो लोन का बोझ कैसे चुका पाएगा।


लाकडाउन के चलते विदेशी पर्यटकों का आना जाना बाधित है। जिससे अर्थव्यवस्था सुचारु रुप से चलती है। विश्व का बड़ा और मजबूत देश भी इस कोरोना से डरा हुआ है।