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पहली बार HC के मौजूदा जज के खिलाफ दर्ज होगा भ्रष्टाचार का मामला, CJI ने CBI को दी अनुमति


चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीटिंग जज एसएन शुक्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधी कानून (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन ऐक्ट) के तहत मामला दर्ज करने की अनुमति दे दी है। चीफ जस्टिस ने यह फैसला जज एसएन शुक्ला के मेडिकल दाखिला घोटाले में शामिल होने के प्रमाण मिलने के बाद लिया है। इससे पहले चीफ जस्टिस ने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था और इस मामले में संसद में कार्रवाई करने के लिए कहा था। जस्टिस शुक्ला पर आरोप है कि उन्होंने एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए कथित तौर पर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों का पक्ष लिया है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में नामांकन की तारीख बढ़ाकर कॉलेजों की मदद की है।

बता दें कि करीब 30 साल पहले 25 जुलाई को 1991 में वीरास्वामी केस में किसी भी जांच एजेंसी को सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में कार्यरत किसी भी जज के खिलाफ साक्ष्य सीजेआई को दिखाए बिना जांच शुरु करने के लिए एफआइआर दर्ज करने की अनुमति नहीं दी गई थी। बता दें कि 1991 से पहले किसी भी एजेंसी ने किसी भी मामले में हाईकोर्ट में कार्यरत किसी भी जज के खिलाफ मामले में जांच नहीं की थी। उसके बाद से यह पहली बार है जब किसी जांच एजेंसी सिटिंग जज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी गई है।

सीबीआई जल्द ही जस्टिस शुक्ला के खिलाफ केस दर्ज करेगी। संभावनाएं है कि जस्टिस शुक्ला को भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत गिरफ्तार भी कर लिए जाएं। पिछले महीने सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि संसद में जस्टिस शुक्ला को हटाने को लेकर प्रस्ताव लाया जाए।  पहले पूर्व सीजेआइ ने दीपक मिश्रा ने भी सिफारिश की थी कि एक आंतरिक समिति ने जस्टिस शुक्ला को गंभीर न्यायिक कदाचार का दोषी माना था। 

जानकारी के लिए बता दें कि सीबीआई ने प्रसाद इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में मेडिकल एडमिशन घोटाले को लेकर उड़ीसा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज आईएम कुद्दूसी, प्रसाद एजुकेशनल ट्रस्ट के मालिक बीपी यादव, पलाश यादव व बिचौलिए विश्वनाथ अग्रवाल, भावना पांडेय समेत मेरठ के एक मेडिकल कॉलेज के सुधीर गिरी और अन्य अज्ञात सरकारी व निजी संस्थान से जुड़े लोगों पर केस दर्ज किया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 46 मेडिकल कॉलेजों पर अनियमिताओं के चलते अगले एक दो साल तक छात्रों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी।