रामदेव की ट्रस्ट पतंजलि योगपीठ ने 'योग' को टैक्स छूट की अपील जीती



मुंबई: 
बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ ने आयकर अपील अधिकरण (ITAT) में टैक्स छूट से जुड़ा मामला जीत लिया है। ITAT ने यह माना कि 'योग' स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं और शिक्षा उपलब्ध कराता है जो चैरिटी के दायरे में आता है। आयकर कानून के सेक्शन 11 और 12 के तहत चैरिटेबल संस्थाओं को टैक्स छूट का लाभ मिला हुआ है।

ITAT ने 9 फरवरी के अपने आदेश में कहा, 'आयकर विभाग का निष्कर्ष तार्किक नहीं है।' आयकर विभाग ने कहा था कि पतंजलि योगपीठ द्वारा प्रचारित किया जा रहा 'योग' मेडिकल राहत और शिक्षा के विस्तार में सहायक नहीं है इसलिए यह चैरिटी के अंतर्गत नहीं आता। ITAT ने अपने फैसले में इनकम टैक्स ऐक्ट में किए गए संशोधन का भी जिक्र किया। 2016 में सरकार ने इनकम टैक्स ऐक्ट में संशोधन करते हुए 'योग' को चैरिटेबल पर्पज माना था। अगर पतंजलि योगपीठ ITAT में यह अपील हार जाता तो उसे आयकर देना पड़ता। हालांकि अधिकरण ने पतंजलि योगपीठ की कुल कमाई का जिक्र अपने फैसले में नहीं किया है।

ITAT ने यह भी माना कि पतंजलि योगपीठ को वनप्रस्थ आश्रम स्कीम के तहत मिली 43.98 करोड़ रुपए की डोनेशन कैपिटल रसीद थी जो आयकर के अंतर्गत नहीं आती। वनप्रस्थ आश्रम स्कीम के तहत योग कोर्स करने आए लोगों के लिए रेजिडेंशियल कॉटेज बनाए जाने थे। पतंजलि योगपीठ को डोनेशन में जमीन भी मिली जिसकी मार्केट रेट आयकर विभाग ने 65 लाख के आसपास आंका। ITAT ने अपने फैसले में कहा, 'कॉर्पस डोनेशन टैक्स के दायरे में नहीं आती। भले ही ट्रस्ट को टैक्स छूट न मिल रही हो।'


ITAT ने पतंजलि की इनकम के स्रोतों से जुड़ा मामला यह कहते हुए हटा दिया कि आयकर विभाग ने तथ्यों को सही से समझा ही नहीं। आयकर विभाग ने पाया था कि ट्रस्ट की आय में 96 लाख रुपए का योगदान वैदिक ब्रॉडकास्टिंग का था जिसके ट्रस्टी रामदेव के करीबी आचार्य बालाकृष्ण हैं।