सिंधु समझौता: बूंद-बूंद पानी निचोड़ने की तैयारी में भारत

भारत जल्द ही सिंधु जल समझौते के तहत पश्चिमी नदियों के पानी में अपने पूरे हिस्से का इस्तेमाल करने की तैयारी में है। यह फैसला भारत-पाकिस्तान की भूराजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है। इसके तहत भारत अगले साल चेनाब नदी पर पनबिजली प्रोजेक्ट भी शुरू कर देगा। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबंध में पंजाब के बठिंडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि एक-एक बूंद पानी रोककर भारत के किसानों तक पहुंचाया जाएगा। इसके पहले 27 सितंबर को पीएम मोदी के सिंधु नदी जल समझौते की समीक्षा करने के फैसले के बाद से इस प्रोजेक्ट को शुरू किए जाने की कवायद चल रही थी। हालांकि इस चेनाब प्रोजेक्ट से पहले सरकार स्वालकोट (1,856 मेगावॉट), पाकुल दुल (1,000 मेगावॉट) और बुरसर (800 मेगावॉट) प्रोजेक्ट को शुरू करेगी।
चेनाब, झेलम नदियों पर बांध बनाना बहुत बड़ा और मुश्किल काम माना जाता है, लेकिन ये प्रोजेक्ट्स पाकिस्तान को भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिहाज से शुरू किए जा रहे हैं। एक अधिकारी के मुताबिक, 'केंद्र सरकार सभी जमीनी स्तर के काम के लिए लगातार जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ संपर्क में है। स्वालकोट प्रोजेक्ट पर 2017 की शुरुआत में ही काम शुरू हो जाएगा। वहीं सरकार की तरफ से प्रोजेक्ट जल्दी पूरा करने के आदेश के बाद अंडर कंस्ट्रक्शन पाकुल दुल प्रोजेक्ट के काम में भी तेजी आ गई है।'
स्वालकोट प्रोजेक्ट के तहत चेनाब नदी पर 193 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाएगा जिससे 1 हजार 856 मेगावॉट बिजली उत्पादन होने का अनुमान है। इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 4 हजार 400 लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा, इसलिए राज्य सरकार काम शुरू होने से पहले ही इन लोगों के पुनर्वास की सारी व्यवस्था कर रही है। वहीं बुरसर प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने में अभी वक्त लगेगा।