बड़ाबाजार के बैंक मैनेजर व टैक्स कंस्लटेंट को सीबीआई ने दबोचा


फेक खाता के जरिये कर चुके हैं करोड़ो की ब्लैक मनी व्हाइट
बड़ाबाजार के 20 बड़े व्यवसायियों का नाम आया है सामने
ओम प्रकाश सिंह
कोलकाता
ब्लैक मनी के खिलाफ प्रधानमंत्री के अभियान को बट्टा लगा रहे लोगों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की छापेमारी ने बड़ाबाजार में बड़ी हेरफेर का खुलासा किया है. इसके साथ ही छापेमारी करने बड़ाबाजार पहुंचने वाले जवानों के खिलाफ यहां के व्यवसायियों की एकजुटता के पीछे की देशविरोधी मानसिकता की भी पोल खोल दी है. दरअसल ईडी ने बड़ाबाजार में कई दफे दबीश देने की कोशिश की है पर यहां के व्यवसायियों ने एकजुटता दिखाते हुये उनके खिलाफ होकर उन्हें अपना काम तक नहीं करने दिया. ऐसे में केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त रूप से योजना बनायी व सादे ड्रेस में तैनात अधिकारियों ने उन लोगों पर नजर रखी जो ब्लैक मनी को व्हाइट करने की जुगत लगा रहे थे. कई दिनों तक आंकड़े इकट्ठा करने के बाद जब एजेंसियों ने पूरे खेल को समझ लिया तब जाकर बुधवार की रात  बड़ाबाजार की एक  शाखा में छापेमारी की व बैंक के मैनेजर अमितेश सिंहा व एक टैक्स कंस्लटेंट संजय जैन को धर दबोचा. रात भर उनसे मैराथन पूछताछ की गयी जिसके बाद दोनों के बयानों ने बड़ाबाजार में ब्लैक मनी के खेल को उजागर कर दिया. इन्हें गुरुवार सुबह ईडी ने सीबीआई के हवाले कर दिया है.
दरअसल पूछताछ में ईडी को पता चला है कि टैक्स कंस्लटेंट संजय जैन ने बड़ाबाजार के व्यवसायियों का ब्लैक मनी व्हाइट करने का ठेका ले रखा था. वे व्यवसायियों को पकड़-पकड़ कर एक  बैंक के उक्त शाखा में ले आते थे व मैनेजर अमितेश सिंहा के साथ मिलकर जाली नाम से खाता खोलते थे. कई खाते खोलकर वे उसमें अपनी ब्लैक मनी डालते ते व बैंक से ही उसे मैनुअली उठा लेते थे. उसके बाद उसका एक मोटा हिस्सा संजय व अमितेश को मिल जाता था. ऐसा करके इन लोगों ने की जाली खाता खोला व करोड़ों के ब्लैकमनी को व्हाइट किया है. दोनों से पूछताछ में केंद्रीय एजेंसियों ने बड़ाबाजार के करीब 20 व्यवसायियों की लिस्ट बरामद की है जिनके ब्लैकमनी को इनलोगों ने व्हाइट किया है. 
इस देश विरोधी कार्य को करने के लिए इन लोगों ने कई तरह की प्लानिंग की थी जिनमें यह भी शामिल है कि बड़ाबाजार में कहीं बी छापेमारी करने पहुंचे केंद्रीय एजेंसियों को खदेड़ देना है ताकि ब्लैकमनी को व्हाइट करने का एकाधिकार इनके पास सुरक्षित रहे. ये लोग इस देशविरोधी काम को लगातार एक महीने से काफी शातिराना तरीके से किये जा रहे थे पर केंद्रीय अधिकारियों को बड़ाबाजार से भगा देने की घटना ने संदेह खड़ा कर दिया था जिसके बाद ईडी ने काफी सतर्कता से जांच अभियान चलाया था जिसमे इस पूरे गोरखधंधे का खुलासा हुआ है. बहरहाल केंद्रीय एजेंसिया अब इन लोगों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुट गया है कि इनके साथ रुपये के इस खेल में और कितने लोग शामिल हैं. एजेंसी सूत्रों की माने तो उन सभी व्यवसायियों की गिरप्तारी भी जल्द होगी जिनका नाम सामने आया है.