Friday, June 3, 2016

गुलबर्ग सोसायटी मामले में 24 दोषी करार, सजा 6 जून को


अहमदाबाद: एक विशेष अदालत ने यहां की गुलबर्ग सोसायटी में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोगों के जघन्य नरसंहार के 14 साल बाद 66 आरोपियों में से आज 24 को दोषी ठहराया जिनमें 11 को हत्या का दोषी पाया गया। किन्तु सभी के विरूद्ध षड्यंत्र के आरोप हटा लिये गए। विशेष न्यायालय के न्यायाधीश पीबी देसाई ने भाजपा पार्षद विपिन पटेल समेत 36 आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। भारतीय दंड संति की धारा 302 (हत्या) के तहत आरोपों को वैध ठहराया गया जबकि उन पर लगाये गये साजिश रचने के आरोप (120 बी) को हटा दिया गया। कुल 66 आरोपियों में से छह की मामले की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गयी।

आज 24 लोगों में से 11 को हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया जबकि विहिप नेता अतुल वैद्य सहित 13 अन्य को अपेक्षाकृत हल्के आरोपों में दोषी ठहराया गया। भादंसं की धारा 120 बी को हटाते हुए अदालत ने कहा कि मामले में आपराधिक साजिश रचे जाने का कोई साक्ष्य नहीं है। इस मामले में दोषी ठहराये गये लोगों को छह जून को सजा सुनायी जायेगी। गुलबर्ग सोसाइटी मामले से पूरा देश तब स्तब्ध रह गया था जब अहमदाबाद के बीचों बीच स्थित इस सोसाइटी पर हमला कर 400 लोगों की भीड ने पूर्व सांसद जाफरी सहित वहां के निवासियों की हत्या कर दी थी। यह घटना 2002 के गुजरात दंगों के संबंध में दर्ज नौ मामलों में शामिल थी जिनकी जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी जांच कर रही थी। इस घटना से एक दिन पहले साबरमती एक्सप्रेस की एस-6 कोच को 27 फरवरी 2002 को गोधरा रेलवे स्टेशन के पास जला दिया गया जिसमें 58 कारसेवक मारे गये थे।

विहिप नेता अतुल वैद्य को भी इस मामले में दोषी ठहराया गया है। कांग्रेस पार्षद मेघ सिंह चौधरी एवं इलाके के तत्कालीन पुलिस निरीक्षक केजी एरडा को दोषमुक्त करार दिया गया है। मामले की निगरानी कर रहे उच्चतम न्यायालय ने एसआईटी अदालत को 31 मई तक अपना फैसला सुनाने का निर्देश दिया था। इस मामले में एसआईटी द्वारा आरोपी बनाये गये 66 लोगों में से नौ पहले से ही जेल में बंद हैं, जबकि अन्य जमानत पर बाहर हैं। अदालती फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जफरी ने इस फैसले पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि सभी को दंडित किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने लोगों को मारा और उनकी संपत्ति नष्ट की। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उन्हें स्वयं अपनी आंखों से यह सब करते हुए देखा।’’ उन्होंने कहा कि एक महिला के रूप में उनमें मृत्युदंड मांगने का साहस नहीं है किन्तु उन्हें कठोर दंड मिलना चाहिए। उनके पुत्र तनवीर जाफरी ने कहा कि वह इस बारे में अपने वकील से बात करेंगे कि 36 अन्य को बरी कैसे कर दिया गया और अपनी अगली रणनीति तैयार करेंगे। तनवीर ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि जब दंगे में 400 लोग शामिल थे तो केवल 24 लोगों को दोषी कैसे ठहराया गया। उन्होंने कहा कि यह परिवार, पड़ोसियों एवं सोसाइटी के अन्य लोगों के लिए एक मुश्किल भरा समय था जिन्हें कानूनी लड़ाई के लिए उच्चतम न्यायालय का द्वारा खटखटाना पड़ा।

मामले की निगरानी कर रहे उच्चतम न्यायालय ने एसआईटी अदालत से कहा था कि वह 31 मई तक अपना फैसला सुनाये। मामले में बरी विपिन पटेल असारवा सीट से वर्तमान भाजपा पार्षद हैं। वह 2002 में भी पार्षद थे जब नरसंहार हुआ था तथा उन्होंने लगातार चौथी बार चुनाव जीता था। सुनवाई के दौरान दंगा पीड़ितों के वकील ने कहा कि गुलबर्ग सोसायटी के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की हत्या के लिए आरोपियों ने आपराधिक साजिश रची थी। बचाव पक्ष के वकील ने अभियोजन पक्ष के साजिश रचने के आरोप को खारिज करते हुए दावा किया कि कांग्रेस नेता एहसान जाफरी द्वारा कई राउंड गोली चलाये जाने के बाद भीड़ हिंसक हो गयी।