Saturday, December 5, 2015

मुलायम बनें पीएम और राहुल उनके डिप्टी: अखिलेश यादव



नयी दिल्ली : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज सुझाव दिया कि कांग्रेस के साथ इस व्यवस्था के साथ गठबंधन संभव है कि समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव प्रधानमंत्री बनें और राहुल गांधी उनके डिप्टी हों. हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में यहां एक परिचर्चा के दौरान अखिलेश ने कांग्रेस उपाध्यक्ष की मौजूदगी में यह बात कही. इस बारे में पूछने पर राहुल गांधी ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या वह गांधी के साथ अपने ‘अच्छे’ निजी संबंधों को कांग्रेस के साथ राजनीतिक स्तर पर ले जाना चाहते हैं.


‘‘आप मुझसे यह इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि मैं समाजवादी हूं और आप यह भी कहते हैं कि मेरे पिता (मुलायम) मुझे डांटते हैं. मैं यह भी चाहता हूं कि नेताजी के सपने पूरे हों और मैं उनके लिए काम करूं. वह प्रधानमंत्री बनें और वह (राहुल की ओर इशारा करते हुए) उप प्रधानमंत्री. मेरी इस पर सहमति है और अगर यह स्वीकार्य हो तो अभी गठबंधन करने को तैयार हूं.’’ वह हालांकि इस सवाल को टाल गए कि उत्तर प्रदेश में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रतिद्वंद्वी बसपा के साथ क्या ऐसा गठबंधन संभव है, जैसा बिहार में जद (यू) और राजद के बीच हुआ. इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘वह (मायावती) पत्थर के हाथी बनवाना पसंद करती हैं. इसलिए ऐसा कैसे संभव होगा. मैं आपको अपना फार्मूला पहले ही बता चुका हूं.’’

इससे पूर्व उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ‘‘इस मौके पर किसी गठबंधन की कोई बात नहीं. बेहतर होगा कि हम इस पर अभी बात नहीं करें.’’ भारत के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य के 42 वर्षीय मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भाजपा और उसके किसी सहयोगी संगठन, जिस तरह की फूट डालते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं उसे देखते हुए उनके साथ कोई रिश्ता संभव नहीं है.

राज्य के कानून और व्यवस्था तंत्र के दादरी जैसी घटना को रोक पाने में असफल रहने के बारे में पूछे जाने पर अखिलेश ने कहा कि ‘‘ऐसा सरकार के हालात को बेकाबू होने से रोकने के प्रयासों के कारण हुआ जैसा एक वर्ग चाहता था.’’ उन्होंने पुलिस तंत्र का भी यह कहते हुए बचाव किया कि घटना के बारे में सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंच गई थी. ‘‘किसी ने नहीं कहा कि पुलिस देर से पहुंची. दरअसल पुलिस ही पीड़ित को अस्पताल लेकर गई.’’

अखिलेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को संदेश दिया कि उन्हें देश को ‘‘अच्छे दिन’’ के रास्ते पर ले जाने पर जोर देना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘अच्छे दिन दिखाने वाले लोग लव जिहाद पर चले गए. कोई क्या खाएगा, कोई क्या पहनेगा और कोई क्या बोलेगा इसका फैसला कौन करेगा? आप (मोदी) गूगल (प्रमुख) से मिलने जाते हैं और फेसबुक के सीईओ के साथ सेल्फी लेते हैं. हमें ये सब भूलना होगा कि कोई क्या खाता है, क्या पहनता है और क्या कहता है.’’

‘‘समलैंगिकता’’ पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘एक तबका इसे सकारात्मक तौर पर लेता है जबकि अन्य इसे बुरा मानते हैं.’’ अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम से रिश्ते पर उन्होंने कहा, ‘‘आप अपने मन में अपने पिता के खिलाफ भावनाएं कैसे रख सकते हैं?’’ गौरतलब है कि मुलायम कई बार अखिलेश को सार्वजनिक तौर पर डांट चुके हैं. मार्च 2012 में उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले अखिलेश ने कहा कि सपा प्रमुख को उनका मार्गदर्शन करने और विचार सुझाने का पूरा हक है.

अखिलेश ने पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह और विवादित बयानों के लिए मशहूर मंत्री आजम खान के साथ सपा के रिश्तों पर पूछे गए सवालों से कन्नी काटी. उन्होंने कहा, ‘‘एक (अमर) अंकल हैं और दूसरे (आजम) चाचा हैं. और नेताजी के साथ अंकल का रिश्ता ऐसा ही रहेगा.’’

दर्शक दीर्घा में बैठे अमर सिंह अखिलेश का बचाव करते नजर आए. अमर ने कहा कि उन्होंने आजम के विवादितों बयानों से दूरी बना ली थी. उन्होंने सवालों से ‘‘कुशलतापूर्वक निपटने’’ के लिए अखिलेश की तारीफ भी की. अखिलेश ने कहा कि मीडिया उत्तर प्रदेश को नकारात्मक तरीके से पेश करने पर तुला है. उन्होंने पूछा कि जब बदायूं कांड की सच्चाई सामने आई तो क्या अंतरराष्ट्रीय संगठनों सहित किसी ने भी माफी मांगी?

उन्होंने कहा, ‘‘सैफई में नेताजी के जन्मदिन समारोह पर क्या विवाद है? हम सूखे के हालात को हल्के में नहीं ले रहे. हमने कुछ जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया है ताकि अतिरिक्त उपाय किए जा सकें.’’


अखिलेश ने आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के उस दावे को भी तवज्जो नहीं दी जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मुलायम ने उन्हें फोन पर धमकी दी. उन्होंने कहा, ‘‘वह जिसे धमकी कहते हैं वह मेरे लिए सलाह है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘वह बहुत चालाक हैं. नेताजी को नहीं पता था कि वह रिकॉर्ड कर रहे हैं. किसी अधिकारी का वैचारिक झुकाव कैसे हो सकता है?’’