Friday, December 18, 2015

निर्भया गैंगरेप केस: नाबालिग दोषी 20 दिसंबर को रिहा होगा, फैसला सुन रोने लगी निर्भया की मां


नई दिल्ली : सोलह दिसंबर 2012 की सामूहिक बलात्कार की दर्दनाक घटना के मामले में दोषी किशोर की रविवार को रिहाई का रास्ता शुक्रवार को उस समय साफ हो गया जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप से इंकार करते हुये कहा कि कानून के वर्तमान प्रावधानों के तहत उसे रिहा होने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट के इस फैसले के बाद 'निर्भया' की मां फूट-फूटकर रोने लगीं। कोर्ट से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा, 'मेरी बेटी के साथ न्याय नहीं हुआ।'
अगर उच्चतम न्यायालय रोक नहीं लगाता है तो अब 20 साल के हो चुके दोषी के 20 दिसंबर को तीन साल की सजा पूरी करने के बाद सुधार गृह से बाहर आने की उम्मीद है।
उसकी रिहाई के खिलाफ लोगों का आक्रोश खारिज करते हुए उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की पीठ ने किशोर न्याय बोर्ड को उसके ‘पुनर्वास एवं सामाजिक मुख्यधारा में लाने’ के संबंध में दोषी, उसके माता पिता और महिला एवं बाल विकास विभाग के संबंधित अधिकारियों से बात करने का निर्देश दिया है।
पीठ ने कहा कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी का किशोर की रिहाई पर रोक लगाने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि वैधानिक और वर्तमान कानून इसकी राह में आड़े आ रहे हैं। पीठ ने दोषी की रिहाई की अनुमति देते हुए कहा कि इस तथ्य को देखते हुए कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 15 (1) के तहत विशेष गृह में अधिकतम तीन साल के लिए रोकने का निर्देश दिया जा सकता है और दोषी 20 दिसंबर 2015 को तीन साल की अवधि पूरी कर लेगा, 20 दिसंबर के बाद विशेष गृह में उसे रोकने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। इसलिए हम याचिकाकर्ता की प्रार्थना के अनुसार कोई निर्देश देने से इंकार करते हैं।
किशोर सहित छह लोगों ने 16 दिसंबर 2012 को दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में 23 साल की लड़की पर हमला और उसका बलात्कार किया था। पीड़ित का 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया था।
मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को निचली अदालत ने सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई थी जिसकी दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुष्टि की थी। उनकी अपील उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं। आरोपी राम सिंह ने 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में कथित रूप से खुदकुशी कर ली थी और उसकी मौत के बाद उसके खिलाफ कार्यवाही बंद हो गई थी। पीड़ित के परिजनों ने तुरंत प्रतिक्रिया में कहा, ‘जुर्म जीत गया, हम हार गये।’ पीड़ित की मां आशा देवी ने संवाददाताओं से कहा, ‘तीन साल तक हमारे इतने प्रयासों के बावजूद, हमारी सरकार और हमारी अदालतों ने एक अपराधी को रिहा कर दिया। हमें यह आश्वासन दिया गया था कि हमें न्याय मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हम बहुत निराश हैं।’
उन्होंने कहा, ‘हमने उसे कभी नहीं देखा है, न कभी मिले हैं लेकिन हमारे सभी प्रयासों के बावजूद अपराधी रिहा हो जाएगा।’ पीड़ित के पिता ने भी आदेश पर निराशा जताई और कहा कि इस मामले में सबक दिया जाना चाहिए था। उन्होंने संकेत दिये कि उनकी फिलहाल उच्चतम न्यायालय जाने की कोई योजना नहीं है।
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केन्द्र सरकार के वकील अनिल सोनी ने कहा, ‘एकबार फिर दिल्ली का आतंक राष्ट्रीय राजधानी की सड़क पर घूमेगा, क्योंकि दुर्भाग्य से राज्य सभा ने गंभीर अपराध में शामिल किशोर की सजा बढ़ाने वाला किशोर न्याय अधिनियम का संशोधन विधेयक पारित नहीं किया।’ उच्च न्यायालय ने कहा कि कानून तोड़ने वाले किशोरों के सुधार के मुद्दे पर गंभीर विचार की जरूरत है और उन्होंने आठ हफ्तों में इस मुद्दे पर केन्द्र तथा दिल्ली सरकार से जवाब मांगा।
दोषी की रिहाई का केन्द्र ने भी विरोध किया था और कहा था कि रिहाई के बाद की पुनर्वास योजना में कई अनिवार्य पहलू नदारद हैं और रिहाई से पहले इन पर विाचर करने की आवश्यकता है। अपनी याचिका में स्वामी ने दावा किया था कि वर्ष 2011 में संशोधित किशोर न्याय :बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण: अधिनियम 2000 में खामी है।
जेजे बोर्ड ने किशोर को तीन साल सुधार गृह में काटने की सजा दी थी।
स्वामी ने याचिका में कहा था कि कानून में उन क्रूर न सुधरने योग्य दोषी किशोरों के के लिए कोई प्रावधान नहीं है जो सुधार गृह में तीन साल की अधिकतम सजा काटकर सुधार प्रक्रिया से गुजरने के बावजूद समाज के लिए खतरा बने हुए हैं। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली स्वामी की याचिका खारिज की थी।
उधर, दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने कहा कि इस मामले के दोषी किशोर की रिहाई पर रोक लगाने से उच्च न्यायालय का इंकार इतिहास का ‘काला दिन’ है और वह उसकी रिहाई के खिलाफ अपील करेगा।
डीसीडब्ल्यू प्रमुख स्वाति मालीवाल ने कहा कि वह किशोर की रिहाई के खिलाफ प्रधान न्यायाधीश और दिल्ली उच्च न्यायालय से अपील करेंगी तथा राष्ट्रपति को पत्र लिखेंगी।
उन्होंने ट्वीट किया, ‘अत्यंत दुख की बात है कि निर्भया का दोषी 20 तारीख को रिहा हो जाएगा। देश के इतिहास का काला दिन। हस्तक्षेप करने के लिए राष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय से अपील करेंगे। निर्भया का बलात्कारी रिहा नहीं होना चाहिए।’