Wednesday, March 11, 2015

गद्दी बचाए रखना सरकार का एजेंडा: नंदकिशोर

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के विश्वासमत प्रस्ताव पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नंदकिशोर यादव ने बुधवार को कहा कि वर्तमान सरकार का अब यही एजेंडा हो गया है कि कैसे गद्दी बचे। कौन चुनौती दे रहा है सरकार के बहुमत को? अनैतिक गठबंधन और तालमेल कर लिया है इन्होंने। राजद और कांग्रेस के साथ जाने के बाद जोड़-तोड़ में तो नीतीश कुमार ने पीएचडी हासिल कर ली है। पर बिहार के विकास के लिए यह अनैतिक गठबंधन विफल होगा। आने वाले चुनाव में नीतीश कुमार को महापराजय का सामना करना पड़ेगा। नंदकिशोर ने अपने संबोधन में कई शेर और कविताओं की पंक्तियां भी पढ़ीं।
उन्होंने कहा कि सच यह है कि सुशासन अब ढह गया। जब नीतीश कुमार की साख खत्म हो गयी और उनके नेतृत्व को चुनौती मिलने लगी। इसे डाइवर्ट करने के लिए उन्होंने त्याग का आडंबर कर इस्तीफा दे दिया। सवाल किया कि ऐसी क्या स्थिति उत्पन्न हो गयी कि बाइस महीने में सरकार के सामने चार बार विश्वासमत हासिल करने की नौबत आ गयी?
नंदकिशोर यादव ने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री पद से हटाये जाने का मसला भी उठाया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपनी छवि के प्रति सजग रहते हैं। यह कौन सी छवि बनायी कि महादलित मुख्यमंत्री को हटाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं को मजाक बना दिया। अगर नीतीश कुमार श्री मांझी से खुद बात कर लेते तो वह उनकी गरिमा के अनुकूल होता। पर वह राजा की तरह व्यवहार करने लगे। पहले बनाओ, वोट बैंक की राजनीति करो और फिर धक्का देकर बाहर कर दो।
नंदकिशोर ने कहा कि आने वाले चुनाव में अहंकार पुन: पराजित होगा। सुशासन और विकास जीतेगा। पर लालू प्रसाद से दोस्ती कर नीतीश कुमार अब सुशासन के प्रतीक नहीं हो सकते। सत्तारूढ़ दल पराजित होगा। जिन लोगों ने विकास की गाड़ी रोकी, जनता उन्हें सबक सिखाएगी। बिहार के चुनाव में दिल्ली नहीं झारखंड का असर दिखेगा। झारखंड में जदयू जीरो पर आउट हो गयी है।